डेयरी के मुख्य प्रबंधक ने कहा-मृतक को ईएसआई से ही नियमानुसार उचित राशि का भुगतान किया जाएगा
गम्हरिया: गम्हरिया स्थित सुधा डेयरी में कार्यरत ठेका मजदूर रविन्द्र नाथ ठाकुर की मौत हो गई। इस मामले में कंपनी प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ रही है और मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग उठने लगी है।
जानकारी के अनुसार, 19 जून को ड्यूटी के दौरान रविन्द्र नाथ ठाकुर की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। आरोप है कि उनकी स्थिति खराब होने के बावजूद कंपनी प्रबंधन ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने के बजाय उनके जगन्नाथपुर स्थित घर भेज दिया।
घर पहुंचने के बाद उनकी हालत और गंभीर हो गई, जिसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए ईएसआई अस्पताल ले गए। वहां से बेहतर उपचार के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) रेफर किया गया।
परिजनों के अनुसार, टीएमएच में दो दिनों तक इलाज चला, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्हें बाद में रांची स्थित रिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
मृतक के निधन के बाद भी कंपनी प्रबंधन के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि प्रबंधन का कोई प्रतिनिधि अब तक शोकाकुल परिवार से मिलने नहीं पहुंचा। वहीं, अंतिम संस्कार के लिए कंपनी की ओर से दी जाने वाली सहायता राशि भी परिजनों को उपलब्ध नहीं कराई गई। रविन्द्र नाथ ठाकुर अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री छोड़ गए हैं।
इधर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व प्रदेश महासचिव अर्जुन यादव ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने झारखंड सरकार, पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि रविन्द्र नाथ ठाकुर पिछले लगभग 30 वर्षों से सुधा डेयरी में ठेका कर्मी के रूप में कार्यरत थे। उनका आरोप है कि यदि ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने पर प्रबंधन ने तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई होती, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने दावा किया कि यह मौत प्रबंधन की संवेदनहीनता, लापरवाही और समय पर इलाज नहीं मिलने का परिणाम है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी कई ठेका कर्मियों की मौत के मामलों में प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। साथ ही लंबे समय से कार्यरत मजदूरों को स्थायी नहीं किए जाने और भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई।
राजद नेता ने मांग की है कि मृतक के आश्रितों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी प्रदान कर आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
इस मामले में डेयरी के मुख्य प्रबंधक हरे कुमार राम ने बताया कि रवींद्र नाथ ठाकुर द्वारा ही बीमार होने के बाद कहा गया कि उसके सिर में चक्कर आ रहा है। वह घर जाना चाहता है। इसलिए उसको घर पहुंचा दिया गया था। जहाँ तक दाह संस्कार की राशि की बात है तो डेयरी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मृतक को ईएसआई से ही नियमानुसार उचित राशि का भुगतान किया जाएगा।
