![]()
नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। भारत सरकार ने देश के पशु चिकित्सा जैविक परीक्षण अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत सरकार ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन अधिसूचित किए हैं, जिसके तहत उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान (सीसीएस-एनआईएएच) में स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) के कार्यों का पशु चिकित्सा टीकों के परीक्षण हेतु विस्तार किया गया है। ये संशोधन औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के प्रावधानों के अंतर्गत भारत के राजपत्र, असाधारण, भाग दो, खंड 3, उपखंड (i) में दिनांक 28 जनवरी, 2026 को राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 65(ई) के माध्यम से अधिसूचित किए गए हैं।
यह अधिसूचना देश में वैक्सीन और जैविक परीक्षण क्षमता को बढ़ाने और पशु चिकित्सा टीकों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढांचे को और मजबूत करने के लिए सरकार के चल रहे प्रयासों के अनुरूप है।
इस संशोधन से पहले, सीसीएस-एनआईएएच को केवल दो पशु चिकित्सा टीकों के परीक्षण के लिए अधिसूचित किया गया था। नवीनतम अधिसूचना के साथ, संस्थान में परीक्षण का दायरा काफी बढ़ गया है, जिससे यह 42 पशु चिकित्सा टीकों का परीक्षण करने में सक्षम हो गया है। इनमें कुत्ते, घोड़े, मुर्गी और अन्य पशुधन को प्रभावित करने वाली बीमारियों जैसे कि कैनाइन डिस्टेंपर, कैनाइन कोरोनावायरस, डक प्लेग, फाउल पॉक्स, साल्मोनेला और टेटनस आदि की रोकथाम और नियंत्रण के लिए उपयोग किए जाने वाले टीके शामिल हैं।
सीसीएस-एनआईएएच में बढ़ी हुई परीक्षण क्षमता से पशु चिकित्सा जैविक उत्पादों के आयात और नियामक मंजूरी में आसानी होने की उम्मीद है, साथ ही पशु चिकित्सा टीकों के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली को भी मजबूती मिलेगी। विस्तारित कार्यक्षेत्र से परीक्षण में लगने वाले समय को कम करने और निर्माताओं के लिए परिणाम प्राप्ति समय को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।
भारत विश्व स्तर पर पशु चिकित्सा टीकों के अग्रणी उत्पादकों में से एक है। सीसीएस-एनआईएएच में परीक्षण सुविधाओं का विस्तार पशु चिकित्सा टीका क्षेत्र के विकास में सहयोग देगा, गुणवत्ता सुनिश्चित टीकों की समय पर उपलब्धता को बढ़ावा देगा, और देश भर में पशु स्वास्थ्य और पशुधन उत्पादकता की सुरक्षा में योगदान देगा।
एमएस
