September 9, 2026
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केरल: पहली बार बजट पेश करेंगे सीएम सतीशन, कर्ज के बीच संतुलन होगी सबसे बड़ी चुनौती

केरल: पहली बार बजट पेश करेंगे सीएम सतीशन, कर्ज के बीच संतुलन होगी सबसे बड़ी चुनौती

तिरुवनंतपुरम, 18 जून (आईएएनएस)। केरल की राजनीति और वित्तीय इतिहास में शुक्रवार को एक अहम क्षण दर्ज होने जा रहा है, जब मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन विधानसभा में अपना पहला बजट पेश करेंगे। यह केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि उनके लंबे राजनीतिक सफर के एक महत्वपूर्ण पड़ाव का प्रतीक भी माना जा रहा है।

वी.डी. सतीशन ने इससे पहले कभी मंत्री पद नहीं संभाला, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद अब वह वित्त मंत्री की भूमिका में राज्य का 79वां बजट पेश करेंगे। यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब केरल करीब पांच लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक कर्ज और गंभीर वित्तीय दबावों से जूझ रहा है।

सतीशन के लिए यह अवसर एक लंबे राजनीतिक इंतजार के पूरा होने जैसा है। वर्ष 2011 में जब ओमन चंडी के नेतृत्व में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सत्ता में लौटा था, तब कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि सतीशन को मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी।

विधानसभा में प्रभावशाली वक्ता और नीतिगत मामलों की गहरी समझ रखने वाले नेता के रूप में उनकी पहचान थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें चंडी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया। इस फैसले ने पार्टी के भीतर भी कई लोगों को चौंका दिया था। वर्ष 2001 से लगातार विधानसभा में यूडीएफ की मजबूत आवाज रहे सतीशन को तब और इंतजार करना पड़ा।

पिछले महीने यूडीएफ की शानदार जीत के बाद जब सतीशन ओमन चंडी के आवास पहुंचे थे, तब उन्होंने स्वीकार किया था कि उनकी हमेशा इच्छा थी कि वह चंडी मंत्रिमंडल का हिस्सा बनें, लेकिन यह सपना कभी पूरा नहीं हो सका।

हालांकि राजनीति ने उन्हें एक अलग रास्ता दिया। वर्ष 2021 में कांग्रेस की हार के बाद उन्हें विपक्ष का नेता बनाया गया। उनके आक्रामक तेवर, संगठनात्मक बदलावों और वाम सरकार के खिलाफ लगातार हमलों ने यूडीएफ को फिर से मजबूत किया और अंततः सत्ता में वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।

हालांकि सतीशन के पास मंत्री के रूप में पूर्व अनुभव नहीं है, लेकिन उन्हें आर्थिक और प्रशासनिक मामलों की अच्छी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। नीतिगत मुद्दों पर उनकी पकड़ को लेकर राजनीतिक हलकों में लंबे समय से चर्चा रही है।

अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती जनकल्याण की अपेक्षाओं और राज्य की वित्तीय वास्तविकताओं के बीच संतुलन बनाने की होगी। बढ़ते कर्ज और सीमित वित्तीय संसाधनों के बीच सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या वह ऐसा बजट पेश कर पाएंगे जो आम लोगों को राहत देने के साथ-साथ राज्य के आर्थिक विकास के लिए नई दिशा भी तय कर सके।

यह बजट राजनीतिक दृष्टि से भी प्रतीकात्मक महत्व रखता है। वर्ष 2011 में मंत्रिमंडल में जगह से वंचित रहने वाले सतीशन अब मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में राज्य की आर्थिक दिशा तय करने वाले बजट को पेश करेंगे, जिसे कई लोग उनके राजनीतिक सफर की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं।

डीएससी

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