*क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र और दारीसाई कृषि विज्ञान केंद्र का मामला
*1989 से कार्यरत मजदूरों को हटाया, माझी परगना महाल उतरा समर्थन में
गालूडीह : क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र और दारीसाई कृषि विज्ञान केंद्र में वर्षों से कार्यरत चार आकस्मिक मजदूरों को काम से बैठाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मजदूरों की पुनर्बहाली की मांग को लेकर माझी परगना महाल ने दोनों कृषि केंद्रों के अधिकारियों को पत्र सौंपकर 72 घंटे के भीतर कार्रवाई की मांग की है।
मांग पूरी नहीं होने पर 16 सितंबर से दोनों केंद्रों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कराने की चेतावनी दी गई है।
माझी परगना महाल के प्रखंड अध्यक्ष सह देश विचार सचिव बहादुर सोरेन ने बताया कि सनातन महतो, रविकांत सिंह, रतिकांत सिंह और स्वपन चंद्र वर्ष 1989 से कृषि केंद्र में आकस्मिक मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं।
आरोप है कि वर्ष 2024 में चारों मजदूरों को काम से बैठा दिया गया। इसके विरोध में मजदूर 21 अगस्त से केंद्र के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
2008 के लिखित समझौते का दिया हवाला
महाल ने अपनी मांग के समर्थन में वर्ष 2008 में हुए लिखित समझौते का हवाला दिया है। पत्र में कहा गया है कि उस समय क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, दारीसाई और कृषि विज्ञान केंद्र, दारीसाई के आकस्मिक मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए बैठक आयोजित की गई थी।
बैठक में संबंधित अधिकारियों और मजदूरों की मौजूदगी में हस्ताक्षरयुक्त लिखित दस्तावेज तैयार किया गया था।
महाल के अनुसार, समझौते में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि वर्ष 2008 से इन चार मजदूरों को क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र से कृषि विज्ञान केंद्र, दारीसाई में स्थानांतरित कर काम कराया जाएगा। साथ ही मजदूरों से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर भी सहमति बनी थी।
माझी परगना महाल का कहना है कि इस लिखित समझौते में कहीं भी मजदूरों को काम से हटाने या बैठाने का उल्लेख नहीं है। दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि काम की कमी होने की स्थिति में मजदूरों से किन-किन स्थानों पर काम लिया जाएगा।
35-36 वर्षों से सेवा दे रहे मजदूरों की बहाली की मांग
महाल ने कहा कि चारों मजदूर करीब 35 से 36 वर्षों से केंद्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में लंबे समय से काम कर रहे इन आदिवासी-मूलवासी मजदूरों को अचानक काम से बैठाना उचित नहीं है। संगठन ने तत्काल चारों मजदूरों को उनके कार्यक्षेत्र में पुनर्बहाल करने की मांग की है।
बहादुर सोरेन ने चेतावनी दी कि यदि 72 घंटे के भीतर धरने पर बैठे चारों मजदूरों को काम पर वापस नहीं लिया गया, तो 16 सितंबर से माझी परगना महाल आंदोलन को तेज करेगा।
उन्होंने कहा कि उस दिन से किसी भी पदाधिकारी या मजदूर को केंद्र में काम करने नहीं दिया जाएगा और मुख्य द्वार को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा।
महाल ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी संबंधित कृषि केंद्र के अधिकारियों की होगी।