ईचागढ़ प्रखंड के मौसाढ़ा गांव व मनोहरपुर के पात्थरबासा गांव में हुईं घटनाएं
सरायकेला/मनोहरपुर : कोल्हान में जंगली हाथियों का कहर जारी है। बार-बार हो रही घटनाओं से ग्रामीण दहशत में हैं। मंगलवार रात सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड और पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड में हाथियों से जुड़ी दो अलग-अलग घटनाओं लोग दहशत में हैं। एक घटना में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि दूसरी घटना में एक व्यक्ति की जान चली गई।
जानकारी के अनुसार, ईचागढ़ प्रखंड के मौसाढ़ा गांव में मंगलवार देर रात हाथियों का एक झुंड भोजन और पानी की तलाश में गांव में घुस आया। उस समय अधिकांश ग्रामीण अपने घरों में सो रहे थे। इसी दौरान हाथियों ने एक मकान की दीवार तोड़ दी।
दीवार गिरने से घर के भीतर सो रही एक महिला मलबे में दब गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजनों और ग्रामीणों ने काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। घटना के बाद गांव में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। उनका आरोप है कि तिरुलडीह क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर हो रहे बालू खनन के कारण हाथियों के पारंपरिक मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे वे अब आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं।
लोगों ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सूचना देने के बावजूद अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचे।
वहीं, पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड के पात्थरबासा गांव के कोकलोटाला निवासी 48 वर्षीय दिलेश्वर जातराम की दंतैल हाथी के हमले में मौत हो गई।
बताया जाता है कि मंगलवार देर रात करीब दो बजे वह लघुशंका के लिए घर से बाहर निकले थे। अंधेरे के कारण उन्हें घर के समीप मौजूद हाथी दिखाई नहीं दिया। अचानक हाथी ने उन पर हमला कर दिया और सूंड से उठाकर पटक दिया, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
हाथी के भय से परिजन तत्काल घर से बाहर नहीं निकल सके। बुधवार सुबह उनकी पत्नी बाली जातराम ने बाहर आकर घटना की जानकारी प्राप्त की और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए चक्रधरपुर भेज दिया।
वनपाल अभय कुमार ने बताया कि राज्य सरकार की नई मुआवजा नीति के तहत मृतक के परिजनों को तत्काल एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नौ लाख रुपये की अनुग्रह राशि भी दी जाएगी।
लगातार बढ़ रही हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं से ग्रामीणों में नाराजगी और असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और वन विभाग से प्रभावित परिवारों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने, हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने तथा स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
वन विभाग की हाथियों के हमले से रोकथाम के जो उपाय किए जा रहे हैं, वह योजनाएं दीर्घकालिक हैं। इसमें समय लगेगा तब तक घटनाएं होती रहेंगी। प्रभावित गांव के लोगों का कहना है कि फिलहाल लोगों को मुआवजा से ही काम चलाना पड़ेगा।

