– राज्य के गौरव को बढ़ाने के लिए धरोहरों को सुरक्षित एवं संरक्षित करना जरूरी
-दोनों संरचनाएँ प्रकृति की अमूल्य भूगर्भीय धरोहर, जिनका संरक्षण आवश्यक
-अज्ञानतावश मानवीय हस्तक्षेप से इनके विनष्ट होने का उत्पन्न हो सकता
जमशेदपुर/रांची : विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Roy ने झारखंड की दो दुर्लभ भूगर्भीय संरचनाओं को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री को प्रेषित पत्र में उन्होंने पश्चिम सिंहभूम स्थित दलमा महासागरीय ज्वालामुखी क्षेत्र तथा हजारीबाग जिले के मांडू के समीप स्थित दूधी नाला क्षेत्र को जियोलॉजिकल हैरिटेज (भूगर्भीय धरोहर) घोषित करने की मांग की है।
अपने पत्र में कहा है कि झारखंड में मौजूद ये दोनों प्राकृतिक स्थल अत्यंत दुर्लभ और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यदि इन्हें समय रहते संरक्षित नहीं किया गया तो अज्ञानतावश मानवीय हस्तक्षेप के कारण इनके नष्ट होने का खतरा बना रहेगा। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस को ऐसी घोषणा के लिए सबसे उपयुक्त अवसर बताते हुए सरकार से त्वरित पहल करने का आग्रह किया है।
राय ने पत्र में उल्लेख किया है कि दलमा क्षेत्र लगभग 160 करोड़ वर्ष पुराने महासागरीय ज्वालामुखी का महत्वपूर्ण अवशेष है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार यह क्षेत्र छोटानागपुर और सिंहभूम टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव से अस्तित्व में आया था।
इस भूगर्भीय घटना ने तांबा, यूरेनियम और सोने जैसे खनिजों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चांडिल और जमशेदपुर के बीच सहरबेड़ा स्थित चिलगू बस स्टॉप के निकट ज्वालामुखीय राख के अवशेष और आग्लोमरेट संरचनाएं आज भी मौजूद हैं, लेकिन वे मानवीय हस्तक्षेप के कारण क्षति का सामना कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि दलमा अभयारण्य की ओर जाने वाले मार्ग पर ‘पिलो लावा’ जैसी दुर्लभ संरचनाएं भी पाई गई हैं, जो सामान्यतः समुद्र या महासागर की तलहटी में हुए ज्वालामुखी विस्फोटों से निर्मित होती हैं।
झारखंड खनिज प्रोग्रामिंग बोर्ड इस क्षेत्र को जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति दे चुका है। वहीं, Geological Survey of India की रांची इकाई द्वारा किए गए प्राथमिक अध्ययन में भी इसे भूगर्भीय धरोहर घोषित करने के योग्य माना गया है।
दलमा क्षेत्र को जियोलॉजिकल हैरिटेज का दर्जा मिलने से यह अनमोल प्राकृतिक धरोहर भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित हो सकेगी। वर्तमान में झारखंड में केवल Rajmahal Fossil Park को ही भूगर्भीय धरोहर का दर्जा प्राप्त है, जबकि राज्य में ऐसे कई महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक स्थल मौजूद हैं।
उन्होंने मांडू के समीप स्थित दूधी नाला क्षेत्र का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार यहां लगभग 30 करोड़ वर्ष पुराने महादेशीय हिमनदों से निर्मित भू-संरचनाओं के अवशेष मौजूद हैं। यह क्षेत्र बोकारो नदी का एक सहायक जलस्रोत है।
भूगर्भीय अध्ययनों से संकेत मिलता है कि किसी समय यह क्षेत्र महासागरीय वातावरण का हिस्सा रहा होगा, जहां हिमनदों की गतिविधियां होती थीं और उनके अवशेष आज भी यहां संरक्षित हैं।
राय ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व जानकारी के अभाव में इस क्षेत्र में चेक डैम निर्माण की योजना स्वीकृत हो गई थी, जिससे इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर के नष्ट होने का खतरा उत्पन्न हो गया था।
हालांकि, भू-वैज्ञानिकों की सक्रियता के कारण यह स्थल बचाया जा सका। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थलों को स्थायी संरक्षण प्रदान करने के लिए जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित करना अत्यंत आवश्यक है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि झारखंड की इन अद्वितीय प्राकृतिक धरोहरों को राष्ट्रीय और वैश्विक भूगर्भीय मानचित्र पर उचित पहचान दिलाने के लिए संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि दलमा महासागरीय ज्वालामुखी क्षेत्र और दूधी नाला हिमनद क्षेत्र को जियोलॉजिकल हैरिटेज घोषित किया जाना राज्य के लिए गौरव की बात होगी और इससे झारखंड को विश्वस्तरीय भूवैज्ञानिक पहचान प्राप्त होगी।

