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पटना, 4 जून (आईएएनएस)। बिहार के मुजफ्फरपुर में एक निजी अस्पताल में गुरुवार सुबह लगी आग ने एक बार फिर अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में चार मरीजों की मौत हो गई, जबकि फायर ब्रिगेड की टीम ने बहादुरी दिखाते हुए 23 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घटना के बाद बिहार अग्निशमन सेवा की महानिदेशक (डीजी) शोभा अहोतकर ने पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है और अब पूरे बिहार में निजी अस्पतालों और होटलों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा।
डीजी शोभा अहोतकर ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि आग मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू वार्ड में लगी थी। जैसे ही फायर ब्रिगेड को सूचना मिली, चार मिनट के भीतर दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। उन्होंने बताया कि आईसीयू में भर्ती लगभग सभी मरीज ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे, इसलिए बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था। दमकल कर्मियों ने जोखिम उठाकर एक-एक मरीज को सुरक्षित बाहर निकाला। कुल 23 मरीजों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया। हालांकि चार मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी। डीजी के अनुसार इन चार लोगों की मौत जलने से नहीं, बल्कि धुएं के कारण दम घुटने से हुई।
शोभा अहोतकर ने कहा कि जैसे ही आग लगी, अस्पताल के कर्मचारी वहां से चले गए। ऐसे में गंभीर हालत में भर्ती मरीज पूरी तरह असहाय हो गए। उन्होंने कहा कि अगर अस्पताल का स्टाफ मौके पर मौजूद रहता और समय पर सहायता करता तो शायद जानमाल का नुकसान कम हो सकता था। उन्होंने साफ कहा कि जिन चार लोगों की मौत हुई है, उसके पीछे अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों की लापरवाही एक बड़ा कारण है।
डीजी ने बताया कि नवंबर महीने में संबंधित अस्पताल का फायर ऑडिट किया गया था। अब यह जांच की जाएगी कि ऑडिट में दिए गए सुरक्षा निर्देशों का अस्पताल प्रबंधन ने पालन किया था या नहीं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक राज्यभर में करीब 7,500 निजी और सरकारी अस्पतालों का फायर ऑडिट कराया जा चुका है। जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया गया, उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। कई अस्पतालों और होटलों को सुधार के लिए 15 दिन से एक महीने तक का समय दिया गया है।
डीजी ने कहा कि अब केवल नोटिस देकर छोड़ने का समय नहीं है। जिन संस्थानों ने निर्देशों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
मुजफ्फरपुर हादसे के बाद अग्निशमन विभाग ने एक और बड़ा फैसला लिया है। अब बिहार के सभी निजी अस्पतालों को एक सप्ताह के भीतर अपने संस्थान का इलेक्ट्रिकल लोड एनालिसिस सर्टिफिकेट जमा करना होगा। अस्पताल प्रबंधन को यह प्रमाणित करना होगा कि उनकी बिजली व्यवस्था सुरक्षित है, कहीं ओवरलोडिंग नहीं है और शॉर्ट सर्किट जैसी कोई संभावना नहीं है।
डीजी ने कहा कि अधिकांश आगजनी की घटनाओं के पीछे शॉर्ट सर्किट प्रमुख कारण बनकर सामने आता है। इसलिए बिजली व्यवस्था की जांच को अनिवार्य किया जा रहा है। यदि एक सप्ताह के भीतर अस्पतालों ने यह प्रमाण पत्र जमा नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि फायर ऑडिट के दौरान केवल अग्निशमन विभाग ही नहीं बल्कि बिजली विभाग के इंजीनियर भी साथ रहते हैं। टीम अस्पतालों में जाकर वायरिंग, बिजली के उपकरण, लोड क्षमता और सुरक्षा मानकों की जांच करती है। इसके अलावा आईसीयू और अन्य संवेदनशील वार्डों में स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य अग्निशमन उपकरणों की भी जांच की जाती है।
डीजी शोभा अहोतकर ने कहा कि अस्पतालों को लगातार सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन कई जगहों पर इनका पालन नहीं किया जाता। यही कारण है कि हादसों का खतरा बना रहता है।
सिर्फ अस्पताल ही नहीं, राज्यभर के होटलों को भी सख्त चेतावनी दी गई है। अग्निशमन विभाग ने सभी होटल संचालकों को एक सप्ताह के भीतर प्रमाण पत्र देने को कहा है, जिसमें यह जानकारी देनी होगी कि उनके यहां कितने एलपीजी सिलेंडर रखे गए हैं और उन्हें किस प्रकार सुरक्षित रखा गया है।
डीजी ने बताया कि होटलों में जांच के दौरान अक्सर सिलेंडरों की संख्या और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गड़बड़ियां सामने आती हैं। इसलिए अब होटल मालिकों को स्वयं प्रमाणित करना होगा कि उनके यहां मौजूद सिलेंडरों की संख्या सही है और सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बाद में जांच में दी गई जानकारी गलत पाई जाती है तो संबंधित होटल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर होटल को सील भी किया जा सकता है।
डीजी ने बताया कि कई होटलों और संस्थानों को पहले ही नोटिस भेजे जा चुके हैं। कुछ मामलों में सीलिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के सहयोग से यह कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।
