पीएम स्वनिधि योजना ने व्यवसाय को दी नई दिशा, छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनाने में मददगार

नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के छह वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर के लाखों रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता का माध्यम बनी है, बल्कि छोटे व्यापारियों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके व्यवसाय को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

हरियाणा के फरीदाबाद निवासी राजेश कुमार इसकी एक मिसाल हैं। वर्षों से चोले-भटूरे का ठेला लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करने वाले राजेश कुमार सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे थे। बढ़ती महंगाई और कारोबार की चुनौतियों के बीच उनके लिए व्यवसाय को आगे बढ़ाना आसान नहीं था। ऐसे समय में पीएम स्वनिधि योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई।

योजना के तहत मिले ऋण ने उन्हें अपने कारोबार को संभालने और विस्तार देने में मदद की। इसके अलावा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के वेबिनार के माध्यम से उन्हें खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और गुणवत्तापूर्ण सेवा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त हुईं। उन्होंने साफ-सफाई, व्यक्तिगत स्वच्छता और सुरक्षित खाद्य सामग्री के उपयोग जैसी अच्छी आदतों को अपनाया, जिससे ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ा।

राजेश कुमार आईएएनएस से बात करते हुए बताया, “योजना अपनाने से पहले कारोबार काफी कमजोर था और आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। बाजार से लिया गया कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा था। पीएम स्वनिधि योजना के तहत उन्हें पहले 10 हजार रुपए और बाद में 20 हजार रुपए का ऋण मिला, जिससे व्यवसाय में सुधार आया और आय बढ़ने लगी। इस योजना ने उन्हें केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान किया।”

वहीं झारखंड की राजधानी रांची के निवासी गोपाल प्रसाद बर्मन की कहानी भी प्रेरणादायक है। गोपाल पहले एक छोटी चाय की रेहड़ी चलाकर अपने परिवार का गुजारा करते थे। सीमित आय के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल था और व्यवसाय के विस्तार के लिए पर्याप्त पूंजी भी नहीं थी। इसी दौरान उन्हें पीएम स्वनिधि योजना की जानकारी मिली और उन्होंने इसका लाभ उठाया।

योजना के तहत मिले पहले ऋण से उन्होंने बड़ा चूल्हा, अतिरिक्त बर्तन और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी। इसके बाद उन्होंने चाय के साथ नाश्ते की बिक्री भी शुरू की। मेहनत और नियमित बचत के दम पर उन्होंने निर्धारित समय में ऋण चुका दिया और अपने कारोबार को आगे बढ़ाया।

गोपाल प्रसाद बर्मन ने बताया, “सड़क किनारे कारोबार करने वालों को मौसम और बाजार की परिस्थितियों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बारिश, गर्मी और सर्दी का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ता है। इसके बावजूद पीएम स्वनिधि योजना की मदद से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और अब वे पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहे हैं।”

एससीएचवीसी

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