बाली टोल प्लाजा पर डिजिटल पेमेंट बना पुलिस की सबसे बड़ी लीड
चंद्रनाथ रथ की सीट की पहले से थी जानकारी, पेशेवर सुपारी किलिंग की आशंका
यूपी और बिहार में SIT की छापेमारी, चोरी की कार और बाइक बरामद
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति को झकझोर देने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में पुलिस को अहम सुराग हाथ लगा है। जांच के दौरान एक UPI ट्रांजैक्शन ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में बड़ी मदद की है। इसी कड़ी में बंगाल पुलिस ने उत्तर प्रदेश से तीन और बिहार से एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है।
मध्यमग्राम में बुधवार रात हुई इस सनसनीखेज हत्या के चार दिन बाद तक पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा था, लेकिन अब डिजिटल पेमेंट की एक छोटी सी गलती ने पूरे केस की दिशा बदल दी है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, हत्या के बाद फरार होते समय आरोपियों ने बाली टोल प्लाजा पर UPI के जरिए भुगतान किया था। टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल ट्रांजैक्शन की मदद से पुलिस उन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को ट्रैक कर रही है, जिनका संबंध हत्या की साजिश से हो सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यही डिजिटल फुटप्रिंट अब शूटरों की पहचान और उनके भागने के नेटवर्क का खुलासा करेगा।
SIT की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या पूरी प्लानिंग के तहत की गई थी। हमलावरों को पहले से पता था कि चंद्रनाथ रथ SUV की अगली सीट पर बैठे हैं। बताया जा रहा है कि रथ के घर से करीब 200 मीटर पहले एक सिल्वर रंग की निसान माइक्रा कार ने उनकी गाड़ी को रोका। इसके तुरंत बाद बाइक सवार बदमाशों ने सीधे उसी खिड़की पर गोलियां बरसाईं, जहां रथ बैठे थे।
पुलिस का मानना है कि वारदात को अंजाम देने वाले शूटर पेशेवर सुपारी किलर हो सकते हैं। इस मामले में कम से कम आठ लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। जांच के दौरान पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई निसान माइक्रा कार और दो मोटरसाइकिलें बरामद की हैं, जो चोरी की निकली हैं।
इसी आधार पर पुलिस की विशेष टीमों ने उत्तर प्रदेश और बिहार में छापेमारी की, जहां से चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही हत्या की पूरी साजिश का खुलासा हो सकता है।
चंद्रनाथ रथ भारतीय वायुसेना के पूर्व कर्मी थे और उन्हें भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का करीबी माना जाता था। हत्या के बाद उनके पार्थिव शरीर को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पैतृक गांव कुलुप ले जाया गया, जहां राष्ट्रीय ध्वज में लपेटकर उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
