जमशेदपुर : आखिरकार आर्थिक तंगी की वजह से घाटशिला के पीडीएस डीलर की मौत हो गई। घाटशिला के पीडीएस डीलर मृणाल कांति रजक की कथित आत्महत्या ने सिर्फ एक परिवार को नहीं उजाड़ा, बल्कि झारखंड के हजारों पीडीएस डीलरों की जिंदगी में छिपे आर्थिक संकट और मानसिक दबाव को भी सामने ला दिया है। वर्षों से लंबित कमीशन, बढ़ते कर्ज और रोजमर्रा की परेशानियों के बीच संघर्ष कर रहे डीलरों ने गुरुवार को उपायुक्त कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर अपनी पीड़ा जाहिर की।
प्रदर्शन में शामिल डीलरों और सामाजिक संगठनों ने कहा कि मृणाल कांति रजक ने अपने पीछे छोड़े सुसाइड नोट में आर्थिक तंगी और बकाया कमीशन का जिक्र किया है। उनका कहना था कि राशन वितरण की जिम्मेदारी निभाने वाले डीलर खुद आर्थिक बदहाली का सामना कर रहे हैं। कई डीलर कर्ज लेकर दुकान चला रहे हैं, जबकि महीनों से कमीशन भुगतान नहीं होने के कारण परिवार का खर्च तक चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शनकारियों ने भावुक स्वर में कहा कि मृणाल कांति रजक की मौत केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है, जिसमें जनसेवा करने वाले लोग ही उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि मृतक के आश्रित परिवार को तत्काल 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा के आधार पर पीडीएस लाइसेंस आवंटित किया जाए, ताकि परिवार का भविष्य सुरक्षित रह सके।
डीलरों ने चेतावनी दी कि यदि लंबित कमीशन का भुगतान जल्द नहीं किया गया और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन पूरे राज्य में तेज किया जाएगा। उनका कहना था कि आज मृणाल कांति रजक का परिवार संकट में है, कल किसी और डीलर की बारी हो सकती है।

