September 10, 2026
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ऋषिकेश के वानप्रस्थ आश्रम में गंगा तट पर स्वामी गोविन्द देव जी गिरी महाराज की प्रखर वाणी से बह रही आध्यात्मिक धारा

ऋषिकेश के  वानप्रस्थ आश्रम में गंगा तट पर स्वामी गोविन्द देव जी गिरी महाराज की प्रखर वाणी से बह रही आध्यात्मिक धारा

चंद्रदेव सिंह राकेश

ऋषिकेश : देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र नगर ऋषिकेश में इन दिनों आध्यात्मिकता की ऐसी पावन गंगा बह रही है, जो श्रद्धालुओं के मन, मस्तिष्क और आत्मा को आलोकित कर रही है। गंगा के निर्मल तट पर स्थित वानप्रस्थ आश्रम इन दिनों आध्यात्मिक साधना और भक्ति की जीवंत धारा से गुंजायमान है। कोलकाता के श्रद्धालु बयानी परिवार की ओर से यहाँ एक भव्य धार्मिक आयोजन चल रहा है, जिसमें कथा वाचक के रूप में प्रतिष्ठित संत स्वामी गोविन्द देव जी गिरी महाराज प्रवचन दे रहे हैं।

इस आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। हर दिन सैकड़ों लोग वानप्रस्थ आश्रम पहुंच रहे हैं, जहाँ गंगा आरती, भक्ति संगीत और स्वामी जी के दिव्य प्रवचन से वातावरण दिव्य और मंगलमय बन रहा है।

गंगा तट पर भक्ति व श्रद्धा का अद्भुत संगम
ऋषिकेश सदियों से संतों, ऋषियों और साधकों की तपस्थली रही है। यहाँ बहने वाली गंगा न केवल भौतिक रूप से जीवनदायिनी है, बल्कि अध्यात्म और मोक्ष की पावन धारा भी है। गंगा के इसी तट पर स्थित वानप्रस्थ आश्रम इन दिनों भक्ति, साधना और आध्यात्मिक अनुभूतियों का केंद्र बना हुआ है। गंगा आरती की मधुर ध्वनि, शंख-घंटी और वेद मंत्रों की गूंज श्रद्धालुओं को एक अलग ही लोक में ले जाती है। शाम को जब गंगा की लहरों पर दीपदान होता है, तो मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।

स्वामी गोविन्द देव जी गिरी महाराज का प्रवचन
प्रवचन कर रहे हैं संतप्रवर स्वामी गोविन्द देव जी गिरी महाराज। हर

दिन दो सत्र में उनकी कथा हो रही हैं.

उनका सरल और प्रभावी वचन लोगों के हृदय में सीधे उतर रहा है। स्वामी जी गीता, पुराण और उपनिषदों के गूढ़ संदेशों को सरल भाषा में समझाते हुए बताते हैं कि मानव जीवन का असली उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और ईश्वर की भक्ति है।

वे कहते हैं कि गंगा जल की तरह मन को भी निर्मल बनाना होगा। बाहरी पूजा तभी सार्थक होगी जब भीतर से आचरण पवित्र और निश्छल होगा।

श्रद्धालुजन उनकी वाणी सुनकर आत्मविभोर हो उठते हैं। कथा के दौरान भजन और कीर्तन की मधुर स्वर लहरियां श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो देती हैं।

सेवा व श्रद्धा का अनूठा उदाहरण
इस आयोजन की संपूर्ण व्यवस्था कोलकाता के श्रद्धालु बयानी परिवार की ओर से की जा रही है। परिवार के सदस्य वर्षों से धार्मिक आयोजनों से जुड़े रहे हैं और ऋषिकेश के इस आश्रम से भी उनका गहरा लगाव है।

बयानी परिवार का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मकता, संस्कार और भक्ति की धारा प्रवाहित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन से न केवल परिवार और समाज का आध्यात्मिक उत्थान होता है, बल्कि अगली पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जड़ों से जोड़ने का अवसर मिलता है।

श्रद्धालुओं की भीड़ व आस्था की छटा
कथा और प्रवचन में भाग लेने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुँच रहे हैं। ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून के साथ ही दिल्ली, उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल और झारखंड से भी श्रद्धालु यहाँ आ रहे हैं।

कई श्रद्धालुओं ने बताया कि स्वामी जी के प्रवचन ने उनके जीवन की सोच ही बदल दी है। एक श्रद्धालु का कहना था कि हम अक्सर जीवन की छोटी-छोटी कठिनाइयों में उलझ जाते हैं, लेकिन स्वामी जी के प्रवचन सुनकर लगता है कि जीवन का असली उद्देश्य ईश्वर को पाना और दूसरों के लिए उपयोगी बनना है।

संगीत व भक्ति की गूंज
कथा के दौरान भजन संकीर्तन का विशेष महत्व है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ गाए जाने वाले भजन श्रद्धालुओं को गहरे भक्ति रस में डुबो देते हैं। ‘हरे राम हरे कृष्ण’, ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ जैसे भजनों से पूरा आश्रम गूंज उठता है।

छोटे-छोटे बच्चे भी कथा और कीर्तन में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। युवाओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

सांस्कृतिक व आध्यात्मिक संदेश
प्रवचन और कथा में न केवल धर्म और अध्यात्म की बातें हो रही हैं, बल्कि सामाजिक संदेश भी दिए जा रहे हैं। स्वामी गोविन्द देव जी गिरी महाराज ने समाज में शिक्षा, संस्कार, नशा मुक्ति और आपसी सद्भाव पर विशेष बल दिया।

उन्होंने कहा कि अगर हर व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, करुणा और सेवा को अपनाए तो समाज की कई समस्याएँ अपने आप खत्म हो जाएंगी।

गंगा की गोद में अलौकिक अनुभव
श्रद्धालुओं का कहना है कि गंगा के तट पर कथा सुनना और भक्ति करना एक अनोखा अनुभव है। गंगा की कलकल धारा, हिमालय की पवित्र वादियाँ और स्वामी जी की वाणी मिलकर ऐसा वातावरण रचती हैं, जो आत्मा को शांति और आनंद से भर देती है।

भविष्य की पीढ़ी के लिए प्रेरणा
बयानी परिवार ने इस आयोजन में विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को जोड़ने का प्रयास किया है। छात्र-छात्राएँ कथा में भाग लेकर भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को समझ रहे हैं।

कई युवा श्रद्धालुओं ने कहा कि स्वामी जी के प्रवचन से उन्हें जीवन की दिशा मिली है और वे इसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे

वास्तव में यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा है। गंगा तट पर हो रहे इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया है कि आज भी लोग धर्म, अध्यात्म और संस्कृति से गहरे जुड़े हैं।

वाकई, ऋषिकेश का यह आयोजन केवल बयानी परिवार की श्रद्धा और सेवा का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि भारतीय समाज में आज भी अध्यात्म की धारा निरंतर बह रही है। स्वामी गोविन्द देव जी गिरी महाराज के प्रवचन और गंगा की पवित्र गोद में बह रही भक्ति धारा ने लोगों को जीवन की सच्चाई, ईश्वर की उपासना और मानवता की सेवा का वास्तविक अर्थ समझाया है।

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