हेमंत सोरेन का आरोप, भाजपा नेता आदिवासी सीएम को निशाना बना रहे हैं

‘गिद्ध जैसा’ व्यवहार करने का आरोप, केंद्र द्वारा बकाया भुगतान करने पर कल्याण में वृद्धि का वादा

प्रमुख बिंदु:

• सीएम सोरेन ने भाजपा नेताओं पर आदिवासी नेता के तौर पर उनके खिलाफ़ एकजुट होने का आरोप लगाया

• केंद्र द्वारा 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया लौटाने पर जेएमएमएसवाई सहायता बढ़ाने का वादा

• सिमडेगा और खूंटी जिलों के लिए 587 करोड़ रुपये की 213 परियोजनाओं का उद्घाटन

रांची – मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाजपा नेताओं पर उनकी आदिवासी पहचान के कारण उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि एक दर्जन से अधिक मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेता उन्हें पद से हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

सोरेन ने ये आरोप खूंटी जिले में एक सरकारी समारोह में लगाए।

उन्होंने भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ को झारखंड में ‘गिद्धों’ की तरह मंडराते नेता बताया।

इसके अलावा, सोरेन ने वादा किया कि अगर केंद्र राज्य का बकाया लौटा देता है तो वह कल्याण सहायता बढ़ा देंगे।

उन्होंने झारखंड मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना को बढ़ाकर 2,000 रुपये मासिक करने का संकल्प लिया।

यह वृद्धि केंद्र से 1.36 लाख करोड़ रुपये या उसका ब्याज प्राप्त होने पर निर्भर है।

इसके अलावा, सोरेन ने भाजपा पर लोगों को धार्मिक और जातिगत आधार पर बांटने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

उन्होंने विपक्ष की इस बात के लिए आलोचना की कि जेएमएमएसवाई को वोट के लिए शुरू किया गया है।

इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने गांवों को सशक्त बनाने और साहूकारों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा।

सोरेन ने आगामी पांच वर्षों में प्रत्येक परिवार को एक लाख रुपये देने का वादा किया।

दूसरी ओर, उन्होंने आबकारी कांस्टेबल पद के उम्मीदवारों की हुई मौतों पर चिंता जताई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन मौतों के पीछे दोषपूर्ण कोविड वैक्सीन की खुराक हो सकती है।

उन्होंने व्यक्तिगत चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया कि भारत में प्रतिबंधित टीकों का उपयोग जारी है।

इस बीच, सोरेन ने सिमडेगा और खूंटी जिलों के लिए 587 करोड़ रुपये की 213 परियोजनाओं का अनावरण किया।

ये आरोप और वादे झारखंड में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच सामने आए हैं।

मुख्यमंत्री के बयान राज्य सरकार और भाजपा के बीच बढ़ती दुश्मनी को दर्शाते हैं।

सोरेन का ध्यान अपनी जनजातीय पहचान पर है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी समुदायों के बीच समर्थन जुटाना है।

कल्याण में वृद्धि के उनके वादे केंद्र के साथ विवादास्पद वित्तीय विवाद पर टिके हुए हैं।

मुख्यमंत्री के वैक्सीन संबंधी दावे विवाद पैदा कर सकते हैं तथा आगे की जांच की मांग कर सकते हैं।

झारखंड में चुनाव नजदीक आने के साथ ही यह राजनीतिक गतिरोध और तेज होने की संभावना है।

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