शहादत दिवस पर स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि दी गई
सामाजिक संगठन नमन के नेतृत्व में स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर उनके प्रेरक बलिदान और साहस को को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई.
जमशेदपुर -खुदीराम बोस के शहादत दिवस पर सामाजिक संस्था नमन ने अपने संस्थापक अमरप्रीत सिंह काले के नेतृत्व में मातृ शक्ति, युवा शक्ति और गणमान्य लोगों की उपस्थिति में उन्हें श्रद्धांजलि दी.
एक बार विदाई माँ; घूरे आसी!
अमरप्रीत सिंह काले ने अमर गीत गुनगुना भावुक हो, शहीद खुदीराम बोस को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में कुछ युवाओं का बलिदान इतना प्रेरणादायक था कि इसने पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल दी, उनमें से एक खुदीराम बोस थे, जिन्हें 11 अगस्त, 1908 को फाँसी दे दी गई.
“आओ झुक कर सलाम करें उनको जिनके हिस्से में ये मंजिल आती है, खुशनसीब होते हैं वो खून जो वतन के काम आते हैं.”
देश के लिए अपना बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के लिए ये पंक्तियां अक्सर गुनगुनाई जाती रही हैं.
देश को अंग्रेजी गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए आजादी की जंग में कूद पड़े स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता.
इसके लिए लड़ने वाले अमर शहीदों के बलिदान के कारण ही हम आजादी की सांस ले रहे हैं.
जो कौम शहीदों की कुर्बानी याद नहीं रखती, वह कौम बर्बाद हो जाती है.
खुदीराम बोस जैसे लाखों क्रांतिकारियों ने देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त कराने के लिए शहादत दी, अपना सब कुछ बलिदान कर दिया, हंसते-हंसते मौत को गले लगा लिया.
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार बृजभूषण सिंह ने कहा कि अमर शहीद खुदीराम बोस का अमर राष्ट्र प्रेम नयी पीढ़ी और देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा.
देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद कराने के लिए कई क्रांतिकारियों ने देश की खातिर हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी. हमें ऐसे क्रांतिकारियों और शहीदों का सम्मान करना चाहिए.
कम उम्र में देश के लिए अपना बलिदान देने वाले अमर शहीद खुदीराम बोस को शत्-शत् नमन.
इस अवसर पर रामकेवल मिश्र ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में खुदीराम बोस का नाम अमिट है.
देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीद खुदीराम बोस के मन में देश के लिए मर-मिटने का जज्बा था, जो आने वाली पीढ़ियों को देश के लिए त्याग, सेवा और बलिदान के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा.
मौके पर उपस्थित अन्य बुद्धिजीवियों ने भी अपने विचार व्यक्त किये और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.
संचालन राजीव कुमार और धन्यवाद ज्ञापन रिया मित्रा ने किया.
इस दौरान अमिताभ चटर्जी, बंटी सिंह, जितेंद्र चावला, बाबू तिवारी, बिपिन झा, बीके शर्मा, अमरजीत सिंह, प्रमिला शर्मा, महेंद्र सिंह, सुखविंदर सिंह निक्कू, सतेंद्र सिंह रोमी, कश्मीर सिंह, पंकज वर्मा, लाला जोशी, पप्पू राव मौजूद रहे. मौके पर महेश मिश्रा, जुगुन पांडे, डी मणि, लक्खी कौर, कमलजीत कौर, ममता पुष्टि, कोमल कुमारी समेत अन्य ने शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की.
