स्वर्णरेखा में जहरीला प्रदूषण: लाखों मछलियों की मौत, सरयू राय ने उठाए गंभीर सवाल
🔸बाबूडीह और लालभट्ठा स्वर्णरेखा नदी घाट का किया भ्रमण
🔸उच्चस्तरीय जांच की मांग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर लापरवाही का आरोप
🔸रिहायशी क्षेत्रों और टाटा स्टील से निकलने वाले बहिस्राव पर संदेह

🔸राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर डेटा नहीं उपलब्ध
🔸नदी का पानी काला, मछलियों में कीड़े और भीषण दुर्गंध
जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गुरुवार को भुईंयाडीह स्थित बाबूडीह और लालभट्ठा स्वर्णरेखा नदी घाट का दौरा किया। 31 मार्च को हुए भीषण जल प्रदूषण के कारण यहां लाखों मछलियों की मौत हो गई थी।
घटना के तीन दिन बाद भी घाटों पर बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां पड़ी हैं। इन मछलियों में कीड़े लग चुके हैं और आसपास के क्षेत्र में तीव्र दुर्गंध फैल रही है। नदी किनारे का पानी काला पड़ चुका है, जिससे प्रदूषण की गंभीरता स्पष्ट झलकती है।
सरयू राय ने आशंका जताई कि रिहायशी इलाकों और टाटा स्टील से निकलने वाले बड़े नालों का दूषित बहिस्राव इस घटना का कारण हो सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट जांच का विषय है कि प्रदूषण का स्रोत औद्योगिक है या अवैध गतिविधियों से उत्पन्न हुआ है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में तीन प्रमुख संस्थाओं—जिला उपायुक्त (जिला पर्यावरण समिति के अध्यक्ष), झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति—को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। लेकिन अब तक इन संस्थाओं की ओर से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
सरयू राय ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सबसे अधिक गैर-जिम्मेदार बताते हुए कहा कि बोर्ड में अधिकारियों और वैज्ञानिकों की भारी कमी है और इसका ध्यान केवल औद्योगिक अनुमतियों तक सीमित रह गया है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर कुछ आंकड़े उपलब्ध हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण जानकारियां गायब हैं। जांच में यह भी सामने आया कि टाटा स्टील द्वारा कई महत्वपूर्ण प्रदूषण मानकों की मॉनिटरिंग के लिए आवश्यक सेंसर और अलर्ट सिस्टम स्थापित नहीं किए गए हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च की रात बीओडी (Biological Oxygen Demand) की मात्रा 439.6 mg/l और सीओडी (Chemical Oxygen Demand) 880.8 mg/l दर्ज की गई, जो निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सायनाइड जैसे खतरनाक तत्वों के स्तर का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।
सरयू राय ने कहा कि यह घटना औद्योगिक लापरवाही और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों की निष्क्रियता का गंभीर उदाहरण है। उन्होंने मांग की कि पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएं और एक निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट सार्वजनिक करें।
