सरयू राय ने कहा-यात्री ट्रेनें समय पर चलाएं वरना मालगाड़ी रोकेंगे, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

21 सदस्यीय समिति बनेगी, रेल मंत्री से मिलने दिल्ली जाएगा प्रतिनिधिमंडल, राजनीतिक दलों को भी इसमें शामिल होने का दिया गया आमंत्रण

आधा दर्जन से ज्यादा संगठनों ने दिया समर्थन, धरना स्थल पर डटे रहे, रेल मंत्री और रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर हुई नारेबाजी

जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि रेलवे यात्री ट्रेनों को समय पर नहीं चलाता है, तो जनता मजबूर होकर मालगाड़ियों को रोकने का कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब व्यापक स्तर पर आंदोलन होगा और जल्द ही 21 सदस्यीय समिति बनाकर दिल्ली में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और रेल मंत्री से मुलाकात की जाएगी।

धरना को संबोधित करते हुए उन्होंने रेलवे प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर स्थानीय सांसद को क्या आश्वासन दिया जाता है और अधिकारियों को किस तरह निर्देश दिए जाते हैं।


अब यह सामूहिक आंदोलन
सरयू राय ने बताया कि शुरुआत में यह धरना उन्होंने अकेले घोषित किया था, लेकिन बाद में कई संगठनों ने समर्थन दिया क्योंकि यह आम जनता से जुड़ा मुद्दा है। मारवाड़ी सम्मेलन, चेंबर ऑफ कॉमर्स, आजसू, विश्व हिंदू परिषद समेत कई संगठनों ने इसमें भागीदारी की।

उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे को सामूहिक रूप से उठाया जाएगा और 20-21 लोगों की एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें सभी वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सभी राजनीतिक दलों को भी इसमें शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है।


लगातार बढ़ रही है समस्या
उन्होंने कहा कि टाटानगर आने-जाने वाली यात्री ट्रेनें रोजाना 4-5 घंटे देरी से चल रही हैं और यह समस्या पिछले तीन से साढ़े तीन साल से बनी हुई है। पहले उम्मीद थी कि समस्या जल्द सुलझेगी, लेकिन समय के साथ स्थिति और बिगड़ती गई।


लंबा इंतजार संभव नहीं
सरयू राय ने कहा कि रेलवे जिन परियोजनाओं की बात कर रहा है, उन्हें पूरा होने में 3 से 5 साल लग सकते हैं। ऐसे में जनता इतना लंबा इंतजार नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कई बार यात्री ट्रेनें घंटों एक ही स्थान पर खड़ी रहती हैं जबकि मालगाड़ियां आगे बढ़ा दी जाती हैं।


यात्रियों की परेशानी गंभीर
उन्होंने कहा कि ट्रेन लेट होने से यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है—परिवारों को परेशानी होती है, बच्चों और बुजुर्गों को दिक्कत होती है और मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ता है।


मालगाड़ी से कम नुकसान
व्यापारियों के हवाले से उन्होंने कहा कि मालगाड़ियों के थोड़ी देर से पहुंचने से ज्यादा नुकसान नहीं होता, लेकिन यात्री ट्रेनों के लेट होने से आम जनता बुरी तरह प्रभावित होती है।


चक्रधरपुर मंडल की अनदेखी
सरयू राय ने आरोप लगाया कि चक्रधरपुर रेल मंडल की लगातार अनदेखी की जा रही है। यहां जिन कार्यों की शुरुआत अब हो रही है, वे अन्य मंडलों में पहले ही पूरे हो चुके हैं।


नई ट्रेनों के दावे पर सवाल
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में वंदे भारत ट्रेन को छोड़कर कोई नई ट्रेन शुरू नहीं हुई है। कोविड के दौरान बंद हुई पुरानी ट्रेनों को ही फिर से शुरू कर उन्हें नई ट्रेन बताया जा रहा है, जो भ्रामक है।


रेल प्रशासन पर नाराजगी
उन्होंने कहा कि यदि पहले समय पर चलने वाली ट्रेनें अब लेट हो रही हैं, तो इसका मतलब है कि मालगाड़ियों को ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है।


समाधान की मांग
सरयू राय ने स्पष्ट कहा कि यात्री ट्रेनों का लगातार लेट होना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने रेल अधिकारियों से संवेदनशीलता दिखाने और तत्काल सुधार करने की मांग की।

धरना में रेलवे अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि ट्रेनें लेट चल रही हैं और समाधान के प्रयास जारी हैं।


समर्थन देने वाले संगठन

अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन, आदिवासी हो समाज, मुंडा समाज, उगता भारत संस्था, चित्रगुप्त कल्याण समिति, चेंबर ऑफ कॉमर्स, विश्व हिंदू परिषद आदि ने समर्थन दिया।

संबोधन करने वाले प्रमुख लोग

शिवशंकर सिंह, सुबोध श्रीवास्तव, हेमंत पाठक, कन्हैया सिंह, मानव केडिया, अजय कुमार, पवन सिंह, अंजलि सिंह, प्रवीण सिंह, आफताब अहमद सिद्दिकी सहित कई वक्ताओं ने विचार रखे।

धरना स्थल बदले जाने पर विवाद

धरना स्थल को बिना सूचना बदले जाने पर कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई और नारेबाजी भी हुई।

नया धरना स्थल

अंततः विधायक सरयू राय की मौजूदगी में नया स्थान तय कर वहीं धरना शुरू किया गया।

नारेबाजी

कार्यकर्ताओं ने रेल मंत्री और रेल प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।

भीषण गर्मी में भी डटे रहे लोग

तेज धूप के बावजूद सैकड़ों लोग धरना स्थल पर डटे रहे।

व्यवस्था की सराहना

धरना में शामिल लोगों को पानी, चाय, बिस्कुट और खीरा वितरित किया गया।

रेलवे सुरक्षा बल की प्रतिक्रिया

एक अधिकारी ने भी माना कि ट्रेनों की लेटलतीफी आम समस्या है और इसका समाधान जरूरी है।

हर गतिविधि पर नजर

रेलवे सुरक्षा बल के जवान धरना स्थल की हर गतिविधि की जानकारी मुख्यालय को देते रहे।

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