झारखंड के 5 मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, एमजीएम में सेवाएं बुरी तरह प्रभावित
जमशेदपुर : एमजीएम मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल समेत झारखंड के पांच प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों ने मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इसका सबसे अधिक असर जमशेदपुर के डिमना स्थित एमजीएम अस्पताल में देखने को मिल रहा है, जहां ओपीडी सेवाएं लगभग ठप हो गई हैं।
पिछले एक महीने से काला बिल्ला लगाकर शांतिपूर्ण विरोध जता रहे जूनियर डॉक्टरों ने अब आंदोलन को तेज करते हुए कार्य बहिष्कार का रास्ता अपनाया है। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से अपने मानदेय में वृद्धि की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें पड़ोसी राज्य बिहार के मुकाबले काफी कम मानदेय मिलता है, जबकि काम का बोझ और जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में वे अपने अधिकारों के लिए मजबूर होकर हड़ताल पर गए हैं।
हालांकि, राहत की बात यह है कि आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गई हैं, लेकिन ओपीडी और अन्य नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दूर-दराज के क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले कई मरीजों को बिना उपचार के लौटना पड़ रहा है या उन्हें निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज कोल्हान क्षेत्र का एकमात्र बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां बड़ी संख्या में गरीब और जरूरतमंद मरीज इलाज के लिए निर्भर रहते हैं। ऐसे में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल ने पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है।
फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मुद्दे पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। जूनियर डॉक्टरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
