एआई आधारित मॉडल भविष्य में शेष आयु आकलन को बनाएंगे और अधिक सटीक: जी. सतीश रेड्डी
जमशेदपुर। सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) में गुरुवार से अभियांत्रिकीय उपकरणों की शेष आयु आकलन (RLA-2026) विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। यह संगोष्ठी 9 और 10 अप्रैल तक आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से करीब 150 वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नीति-निर्माता भाग ले रहे हैं।
इस आयोजन में मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड, ओएनजीसी, जोएल (जापान), जायसवाल नेको, इनसाइट्जज, किसको कास्टिंग्स लिमिटेड, इंस्ट्रॉन, टाटा स्टील, ट्यूबेक्स, आईआईटी खड़गपुर, सीएसआईआर-सीएमईआरआई दुर्गापुर, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और महिंद्रा डिफेंस सहित कई प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जी. सतीश रेड्डी उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने की। इस अवसर पर संगोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार साहू और संयोजक डॉ. सुमंता बगुई भी मंच पर मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
अपने स्वागत संबोधन में डॉ. संदीप घोष चौधरी ने कहा कि देश में पेट्रो-रसायन, ताप विद्युत और खनन क्षेत्रों के लगभग 60 से 70 प्रतिशत औद्योगिक ढांचे अपनी निर्धारित आयु से अधिक समय से संचालित हो रहे हैं। ऐसे में शेष आयु आकलन इन संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके सुरक्षित उपयोग की अवधि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संगोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार साहू ने बताया कि संस्थान ने ताप विद्युत, अंतरिक्ष तथा तेल एवं गैस क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपकरणों की संरचनात्मक मजबूती और दीर्घायु के आकलन में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
मुख्य अतिथि डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि शेष आयु आकलन अब देश के औद्योगिक ढांचे के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन गया है। उन्होंने बताया कि बॉयलर, टरबाइन, दाब पात्र और पाइपलाइन जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका है।
रक्षा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मिसाइल, लड़ाकू विमान और अन्य वायुयान प्रणालियों में भी शेष आयु आकलन अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां सुरक्षा से समझौता किए बिना संरचनात्मक आयु बढ़ाना आवश्यक होता है।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि एआई आधारित मॉडल भविष्य में शेष आयु का अधिक सटीक आकलन करने में सहायक होंगे। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटा का संग्रह बेहद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस आकलन का दायरा केवल यांत्रिक उपकरणों तक सीमित न रहकर विद्युत घटकों तक भी विस्तारित किया जाना चाहिए।
दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में समय-निर्भर विकृति, तनाव-आधारित विफलता, सूक्ष्म संरचना विश्लेषण, डेटा-आधारित मॉडलिंग, उन्नत सेंसर और नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (NDT) तकनीकों सहित इस क्षेत्र के नवीनतम विकास पर चर्चा की जाएगी।
इस संगोष्ठी में विद्युत, तेल एवं गैस, पेट्रो-रसायन, अंतरिक्ष, इस्पात और निर्माण क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ शोधार्थी और विद्यार्थी भी भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे संयोजक डॉ. सुमंता बगुई ने प्रस्तुत किया। आयोजकों के अनुसार, ऐसे आयोजन पुराने औद्योगिक ढांचों की सुरक्षित आयु बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे औद्योगिक दक्षता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलती है।

