धातकीडीह तालाब में हजारों मछलियों की मौत, फिर हरकत में आया प्रशासन
मछलियां मरती हैं, तब जागता है सिस्टम” मौके पर पहुंची प्रशासन और मत्स्य विभाग की टीम, ऑक्सीजन की कमी या जहरीले तत्व की आशंका
पानी शुद्ध करने के लिए तालाब में दवा का छिड़काव शुरू, जांच को सैंपल भेजे गए, रिपोर्ट का इंतजार, लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में बढ़ी चिंता
जमशेदपुर : न जाने क्यूं मछलियों की मौत पर ही जागता है प्रशासन। कभी भी नियमित रूप से चाहे मत्सय विभाग हो या प्रदूषणा नियंत्रण पर्षद नदी और तालाब की जांच नहीं करता। जीव जंतुओं की मौत के बाद ही हरकत में आता है प्रशासन और विभाग। राजनीतिक दल भी घटना होने के बाद ही बयान जारी करता है या निरीक्षण।
एक बार फिर शहर में मछलियों की लगातार हो रही मौत ने प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। कुछ दिनों पहले स्वर्णरेखा नदी में लाखों की संख्या में मछलियां मृत पाई गई थीं, जिससे पर्यावरण और जल प्रदूषण को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। अब बुधवार को बिष्टुपुर के धातकीडीह तालाब में भी हजारों मछलियों के मृत मिलने की घटना सामने आई है।
स्थानीय लोगों ने सुबह तालाब के किनारे बड़ी संख्या में तैरती मछलियां देखीं, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। लोगों ने इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दी।
सूचना मिलते ही प्रशासन और मत्स्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। प्रारंभिक जांच में पानी में ऑक्सीजन की कमी या किसी जहरीले तत्व के मिलने की आशंका जताई जा रही है।
इसके बाद प्रशासन ने तत्काल तालाब में दवा का छिड़काव शुरू कर दिया, ताकि बची हुई मछलियों को सुरक्षित किया जा सके और पानी को शुद्ध किया जा सके।
प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं और पानी के सैंपल को जांच के लिए भेजा गया है। लगातार हो रही इन घटनाओं से लोगों में दहशत का माहौल है और वे जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
क्या है मछलियों की मौत के कारण?
तालाबों में हजारों मछलियों की मौत मुख्य रूप से पानी में जहरीले केमिकल मिलने, दूषित पानी, या अत्यधिक गर्मी के कारण ऑक्सीजन की कमी (Hypoxia) से होती है।
