जमशेदपुर में 40 दिन बाद गूंजे चर्च के घंटे, 45 मिनट अंधेरे में जली ‘मसीह ज्योति’, ईस्टर पर उमड़ा आस्था का सैलाब
जमशेदपुर: शहर के सभी चर्चों में ईस्टर के अवसर पर पूरी रात विशेष प्रार्थना और पूजा-अर्चना हुई। प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की खुशी में मसीही समुदाय ने भक्ति और उल्लास के साथ जश्न मनाया।
करीब 48 घंटे से शांत पड़े चर्चों की बेदियों को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सजाया गया। श्रद्धालुओं ने बाइबिल पाठ किया, यीशु की स्तुति में भजन-कीर्तन गाए और एक-दूसरे को ईस्टर की शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर केक काटकर भी खुशियां साझा की गईं।
बताया जाता है कि प्रभु यीशु के चालीसा (तपस्या और उपवास) काल की शुरुआत 18 जनवरी से हुई थी। इस दौरान रविवार को छोड़कर अन्य दिनों में चर्च के घंटे नहीं बजाए जाते हैं। शनिवार रात ईस्टर पूजा के दौरान 40 दिन बाद चर्च के घंटे फिर से गूंज उठे।
ईस्टर के दिन जमशेदपुर में ईसाई समुदाय ने गहरी श्रद्धा और आस्था के साथ पर्व मनाया। बड़ी संख्या में लोग कब्रिस्तानों में पहुंचकर अपने पूर्वजों को याद करते नजर आए। उन्होंने कब्रों पर फूल-मालाएं अर्पित कीं और आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
पूर्व सांसद सुमन महतो ने बताया कि ईसाई मान्यता के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन प्रभु यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था और तीन दिन बाद वे पुनर्जीवित हुए। यही विश्वास ईस्टर को जीवन, पुनर्जन्म और आशा का प्रतीक बनाता है।
इस दिन श्रद्धालु अपने दिवंगत परिजनों को याद करते हुए यह संदेश देते हैं कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। शहर के चर्चों और कब्रिस्तानों में सुबह से ही प्रार्थना और श्रद्धांजलि का सिलसिला जारी रहा, जिससे पूरा वातावरण श्रद्धामय बना रहा।
