July 29, 2026
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ब्रेकिंग 29 July, 2026 19:54
झारखंड

कोल्हान का सारंडा जल्द होगा नक्सल मुक्त, 5-5 लाख के इनामी सागेन अंगरिया समेत 2 दर्जन नक्सलियों ने किया सरेंडर

कोल्हान का सारंडा जल्द होगा नक्सल मुक्त, 5-5 लाख के इनामी सागेन अंगरिया समेत 2 दर्जन नक्सलियों ने किया सरेंडर

​चाईबासा / रांची: झारखंड के कोल्हान क्षेत्र स्थित एशिया के सबसे घने जंगलों में से एक, सारंडा से एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। कभी नक्सलियों का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाने वाला सारंडा इलाका अब पूरी तरह से नक्सल मुक्त होने के बिल्कुल करीब पहुंच गया है। गुरुवार को इलाके में सक्रिय रहे दो दर्जन से ज्यादा (25 से अधिक) बड़े नक्सलियों ने एक साथ पुलिस और सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया है। इस ऐतिहासिक कदम के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि सारंडा को किसी भी वक्त ‘नक्सल मुक्त’ घोषित किया जा सकता है।

स्पेशल एरिया कमेटी मेंबर सागेन अंगरिया समेत कई शीर्ष नक्सली मुख्यधारा में लौटे

​फिलहाल सरेंडर करने वालों में सबसे बड़ा नाम गोइलकेरा के सांगाजाटा का निवासी और पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली सागेन अंगरिया का है। सागेन संगठन का स्पेशल एरिया कमेटी मेंबर (SAC) है और उसके खिलाफ विभिन्न थानों में हत्या व मुठभेड़ जैसे 123 गंभीर मामले दर्ज हैं। सागेन के साथ ही संगठन के कई अन्य शीर्ष और इनामी कमांडरों ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है।

​इनमें बुंडू (रांची) निवासी पांच लाख का इनामी गादी मुण्डा उर्फ गुलशन शामिल है, जिस पर 48 मामले दर्ज हैं। वहीं अड़की (खूंटी) का निवासी पांच लाख का इनामी नागेंद्र मुण्डा उर्फ प्रभात मुण्डा उर्फ मुखिया भी मुख्यधारा में लौट आया है, जिसके खिलाफ 38 मामले दर्ज हैं। इनके अलावा बुंडू (रांची) की रहने वाली पांच लाख की इनामी महिला नक्सली रेखा मुण्डा उर्फ जयंती (18 मामले) और छोटानगरा (चाईबासा) के पांच लाख के इनामी सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा (13 मामले) ने भी आत्मसमर्पण किया है।

​सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के आगे घुटने टेकने वालों में गोइलकेरा (चाईबासा) का दो लाख का इनामी करण तियू (29 मामले) और किरीबुरू (चाईबासा) की एक लाख की इनामी एरिया कमांडर बासुमती जेराई उर्फ बासू (14 मामले) भी शामिल हैं। इनके साथ ही छोटानगरा के दर्शन उर्फ बिंज हांसदा (14 मामले), मुफस्सिल के रघु कायम उर्फ गुणा (19 मामले), टोंटो के किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका (11 मामले) तथा तमाड़ (रांची) के बैजनाथ मुण्डा (04 मामले) और राम दयाल मुण्डा (04 मामले) ने भी अपने हथियार डाल दिए हैं।

​संगठन के 13 सक्रिय कैडरों ने भी किया आत्मसमर्पण

​शीर्ष और इनामी नक्सलियों के अलावा संगठन के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले 13 अन्य सक्रिय कैडरों ने भी समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों में वंदना उर्फ शांति, सुनिता सरदार, डांगुर बोइपाई, बसंती देवगम, मुन्नीराम मुण्डा, अनिशा कोड़ा उर्फ रानी, सपना उर्फ सुरू कालुंडिया, सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया, बिरसा कोड़ा उर्फ हरिसिंह, नुअस, बुमली तियू, निति माई उर्फ निति हेंब्रम और लादू तिरिया शामिल हैं।

​426 नक्सली वारदातों में थे शामिल, सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी

​आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी नक्सलियों का इतिहास बेहद हिंसक रहा है। इन सभी पर मिलाकर कुल 426 नक्सली घटनाओं में शामिल होने के मामले दर्ज हैं। इसमें दर्जनों सुरक्षा जवानों की हत्या, पुलिस के साथ सीधी मुठभेड़, विकास कार्यों को बाधित करने के लिए किए गए आईईडी (IED) विस्फोट, आगजनी, लेवी (जबरन वसूली) और हथियारबंद हमलों जैसी कई संगीन वारदातें शामिल हैं।

​सारंडा के जंगलों में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे निरंतर सर्च ऑपरेशन और झारखंड सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’ से प्रभावित होकर इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए इस सरेंडर के बाद अब सारंडा में लाल आतंक के खात्मे की बस औपचारिक घोषणा होना ही बाकी है।

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