42 अपग्रेडेड हाई स्कूलों में पढ़ाई ठप, छात्रों की परेशानी बढ़ी
मुख्य बिंदु:
- 42 अपग्रेडेड स्कूलों में शिक्षक और सुविधाओं की कमी
- इंटर सीट घटने से हजारों छात्रों पर संकट गहराया
- निजी स्कूलों की फीस और आरटीई जांच की मांग तेज
जमशेदपुर – पूर्वी सिंहभूम में अपग्रेडेड स्कूलों की खराब स्थिति के खिलाफ विरोध तेज हो गया है।
जमशेदपुर यूथ कांग्रेस ने उपायुक्त कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
हालांकि, जिले में 42 मिडिल स्कूलों को हाई स्कूल बनाया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण छात्रों को स्थानीय स्तर पर पढ़ाई देना था।
लेकिन, अपग्रेड के छह महीने से दो साल बाद भी पढ़ाई शुरू नहीं हुई। कई स्कूल अब भी केवल कागजों में संचालित हैं।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि करीब 80 प्रतिशत स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय सबसे अधिक प्रभावित हैं।
दूसरी ओर, छात्र बिना पढ़ाई के स्कूल पहुंच रहे हैं। इससे उनकी शिक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है।
हालांकि, कई स्कूलों में भवन निर्माण अधूरा है। बेंच, ब्लैकबोर्ड और बिजली जैसी सुविधाएं नहीं हैं।
उधर, पानी और शौचालय की भी कमी बनी हुई है। लैब और लाइब्रेरी भी उपयोग में नहीं हैं।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि 2026 मैट्रिक में 20,726 छात्र पास हुए। इनमें करीब 8,000 छात्र जमशेदपुर से हैं।
लेकिन, जिले में केवल तीन प्लस टू स्कूल बचे हैं। इनकी कुल क्षमता लगभग 1,500 सीट है।
दूसरी ओर, पहले 10 सरकारी संस्थानों में इंटर की पढ़ाई होती थी। वहां लगभग 10,000 छात्रों का नामांकन होता था।
हालांकि, कॉलेजों में इंटर बंद होने से सीटें कम हो गईं। इससे हजारों छात्रों के सामने संकट खड़ा हुआ।
उधर, अब करीब 5,500 छात्रों को निजी स्कूलों में जाना पड़ रहा है। वहां फीस 5,000 से 8,000 रुपये तक है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि अभिभावकों ने फीस की जांच की मांग की। उन्होंने समान फीस नीति लागू करने की अपील की।
हालांकि, आरटीई 2009 के तहत आरक्षित सीटों में अनियमितता का आरोप लगा। इसकी जांच की मांग भी उठी है।
दूसरी ओर, लोगों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की। उन्होंने शिक्षकों की नियुक्ति और सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

