डिजिटल व्यसन रोकने को कर्नाटक मॉडल लागू करने का प्रस्ताव
मुख्य बिंदु:
- छात्रों में बढ़ती स्क्रीन लत पर चिंता जताई गई
- कर्नाटक जैसी नीति लागू करने की मांग उठी
- स्कूलों में डिजिटल अनुशासन कार्यक्रम प्रस्तावित
जमशेदपुर – छात्रों में बढ़ती स्क्रीन लत को रोकने के लिए सरकार से सख्त नीति लागू करने की मांग की गई।
जमशेदपुर में डिजिटल व्यसन को लेकर चिंता बढ़ रही है। सुराज्य अभियान ने इस मुद्दे को उठाया है।
हालांकि प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के जरिए ज्ञापन सौंपा। इसमें मुख्यमंत्री से नीति बनाने की मांग की गई।
दूसरी ओर ज्ञापन में किशोरों की स्थिति पर आंकड़े दिए गए। लगभग 25 प्रतिशत किशोर इंटरनेट के आदी बताए गए।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसका असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। नींद और मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।
हालांकि एकाग्रता में कमी तेजी से देखी जा रही है। चिंता और भटकाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
उधर कर्नाटक के प्रस्ताव का उल्लेख किया गया है। इसमें छात्रों के स्क्रीन उपयोग को सीमित करने की बात है।
हालांकि कक्षा 9 से 12 तक नियम लागू करने की सिफारिश है। पढ़ाई के अलावा एक घंटा सीमा तय की गई है।
दूसरी ओर शाम 7 बजे बाद इंटरनेट बंद करने का सुझाव है। सोने से पहले स्क्रीन से दूरी जरूरी बताई गई।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि चाइल्ड प्लान लागू करने की मांग हुई। इसमें मोबाइल उपयोग सीमित किया जाएगा।
हालांकि जरूरी सुविधाएं ही उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। तय समय बाद इंटरनेट स्वतः बंद होगा।
उधर सुरक्षित उपकरण विकसित करने पर जोर दिया गया। उम्र के अनुसार प्रणाली बनाने की बात कही गई।
दूसरी ओर स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम शामिल करने का सुझाव है। डिजिटल सुरक्षा को पाठ्यक्रम में जोड़ने की मांग है।
हालांकि साइबर बुलिंग और गोपनीयता पर शिक्षण जरूरी बताया गया। जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार सिखाने की बात हुई।
उधर डिजिटल डिटॉक्स डे का प्रस्ताव रखा गया। टेक-फ्री समय लागू करने की सिफारिश की गई।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि गोवा के प्रस्ताव का भी समर्थन हुआ। 16 वर्ष से कम बच्चों पर रोक की चर्चा है।
हालांकि अभियान सदस्यों ने चेतावनी दी है। समय पर कदम नहीं उठाने पर स्थिति गंभीर होगी।

