ममता की साख बनाम बीजेपी की चुनौती, 4 मई को तय होगा सत्ता का संग्राम

Bengal Elections 2026 कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। अप्रैल में दो चरणों में हो रहे इस चुनाव में सत्ता की लड़ाई बेहद दिलचस्प और निर्णायक मानी जा रही है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों पर हो रहे इस मुकाबले में बहुमत के लिए 148 सीटों का आंकड़ा पार करना जरूरी है, और इसी लक्ष्य को लेकर सभी दल पूरी ताकत झोंक चुके हैं।

कोलकाता में 27 अप्रैल को चुनावी पदयात्रा के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी।

इस चुनाव में सबसे बड़ी चुनौती सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने है, जो पिछले 15 वर्षों से राज्य की सत्ता संभाले हुए हैं। ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव केवल सत्ता बचाने का नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक पकड़ और जनसमर्थन को फिर से साबित करने की परीक्षा भी है।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), जो 2021 के चुनाव में मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी, इस बार सत्ता पर कब्जा जमाने के इरादे से मैदान में उतरी है। बीजेपी ने पिछले चुनाव में अपने प्रदर्शन से राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव लाया था और इस बार वह उस बढ़त को जीत में बदलना चाहती है।

दूसरी ओर, कांग्रेस और वाम मोर्चा भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। हालांकि ये दल राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिससे विपक्षी वोटों के बंटवारे की संभावना भी बढ़ गई है।

पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो तीन दशक तक बंगाल की सत्ता पर काबिज रहे वाम मोर्चा का खाता तक नहीं खुल पाया था, जबकि कांग्रेस महज 9 सीटों पर सिमट गई थी। ऐसे में इस बार इन दोनों दलों के लिए अपनी राजनीतिक जमीन वापस हासिल करना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

इस चुनाव की एक खास बात वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर उठे सवालों ने इस चुनाव को और भी अहम बना दिया है।

अब सभी की नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब चुनाव परिणाम घोषित होंगे और यह साफ हो जाएगा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अपनी सत्ता बरकरार रख पाती हैं या बीजेपी पहली बार राज्य में सरकार बनाने में सफल होती है।

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