जमशेदपुर : हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा के मानसून सत्र में लाये गए बिल को लेकर देश भर में विपक्ष का विरोध शुरू हो गया है। रविवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जमशेदपुर में प्रधानमंत्री का पुतला फूंककर जोरदार विरोध किया। झामुमो नेताओं ने बताया कि इस क़ानून के जरिये केंद्र सरकार विपक्ष को समाप्त करना चाहती है। हम केंद्र के सुधारात्मक नीतियों का समर्थन करते हैं मगर इस तरह का बिल का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
बता दें कि जो बिल लाया गया है उसके अनुसार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी यदि किसी आरोप में जेल भेजे जाते हैं और यदि 30 दिन तक उन्हें जमानत नहीं मिलती है तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है। विपक्ष ने इस बिल को साजिश करार देते हुए विरोध शुरू कर दिया है।
जेल जाएंगे मंत्री तो 30 दिन में छोड़ना पड़ेगा पद :
केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को लोकसभा में तीन ऐसे विधेयक पेश किए हैं, जो देश की राजनीति के नियम बदल सकते हैं। ये बिल सीधे तौर पर उन चुनावी राजनीतिक नेताओं को लक्ष्य करते हैं, जो गंभीर अापराधिक मामलों में घिरे हैं। इस विधेयकों का मकसद है कि अगर कोई मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामलों में लगातार 30 दिन तक जेल में रहता है, तो उसे अपने पद से हटना होगा।
30 दिन की हिरासत, फिर हटाने का प्रावधान :
वर्तमान में न तो संविधान में और न ही केंद्र शासित प्रदेशों या जम्मू-कश्मीर के कानूनों में कोई ऐसा प्रावधान है, जो किसी मुख्यमंत्री या मंत्री को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी और लंबी हिरासत की स्थिति में पद से हटाने का रास्ता दिखाए।


