रांची : झारखंड की जेल में बीते पांच वर्षों से बंद 75 वर्षीय माओवादी नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन का रिम्स में निधन हो गया। उनका असली नाम प्रशांत बोस था। जेल में बंद बोस की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के सही-सही कारण का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
इधर उनके शव को लेने भी कोई नहीं पहुंचा। बीते लगभग 40 वर्षों तक माआेवादी संगठन के थिंक टैंक रहे किशन का शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया। प्रशासन ही शनिवार को उनका दाह संस्कार करेगा। परिवार में उनका कोई नहीं है।
कांड्रा टोल ब्रिज के पास 2021 में हुई थी गिरफ्तारी
सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में 200 से अधिक नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड रहा था।
पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने में रही भूमिका
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशांत बोस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रची थी। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में जांच अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि पुणे में भीमा कोरेगांव हिंसा और पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने में प्रशांत बोस की भूमिका थी। एनआईए की चार्जशीट में भी प्रशांत बोस का नाम सामने आया था। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में 30 कांग्रेसी नेताओं की हत्या में उसकी भूमिका थी।
सांस लेने में गंभीर समस्या के बाद मौत
जेल प्रशासन के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे प्रशांत बोस को सांस लेने में गंभीर समस्या होने लगी। आनन-फानन में उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) ले जाया गया। डॉक्टरों की विशेष टीम ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ और सुबह करीब 10 बजे डॉक्टरों ने उनके निधन की पुष्टि कर दी। जेल और अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर दी है।
