September 10, 2026
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राज्यसभा चुनाव: झारखंड में एनडीए के विधायक 18 जून तक एक साथ रहेंगे, इंडिया गठबंधन करेगा मॉक पोल

राज्यसभा चुनाव: झारखंड में एनडीए के विधायक 18 जून तक एक साथ रहेंगे, इंडिया गठबंधन करेगा मॉक पोल

रांची, 16 जून (आईएएनएस)। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को होने वाले मतदान से पहले सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। दो सीटों पर तीन उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से मुकाबला रोमांचक हो गया है। संख्या बल अपने पक्ष में होने के दावों के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों खेमे किसी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते।

संभावित क्रॉस वोटिंग की अटकलों और चुनावी गणित को साधने की कवायद के बीच राज्य में होटल पॉलिटिक्स, बाड़ेबंदी और मॉक पोल जैसी गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरे परिमल नाथवानी को समर्थन दे रहे एनडीए ने अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति अपनाई है।

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी समेत भाजपा और सहयोगी दलों के कई विधायक मंगलवार को रांची के रेडिसन ब्लू होटल पहुंच गए। नाथवानी भी यहीं ठहरे हुए हैं। विधायकों और नेताओं के लिए 18 जून तक होटल में 32 कमरे आरक्षित किए गए हैं। मतदान के दिन सभी विधायक यहीं से एक साथ विधानसभा के लिए रवाना होंगे। दूसरी ओर, झारखंड के सत्तारूढ़ आईएनडीआईए गठबंधन ने भी अपने विधायकों की बैठक मुख्यमंत्री आवास में बुलाई है।

16 और 17 जून को होने वाली इन बैठकों में मतदान प्रक्रिया को लेकर मॉक पोल कराया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं विधायकों के साथ चुनावी रणनीति पर मंथन करेंगे। झारखंड विधानसभा की मौजूदा संख्या के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता है। यानी दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए 56 वोट चाहिए। सत्तारूढ़ आईएनडीआईए गठबंधन दावा कर रहा है कि उसके पास दोनों उम्मीदवारों को जिताने लायक पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।

गठबंधन की ओर से झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा मैदान में हैं। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने कहा कि वह विधानसभा के सभी 81 सदस्यों से समर्थन की अपील कर रहे हैं और उन्हें एनडीए के अलावा अन्य दलों के विधायकों का भी समर्थन मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने हाल के दिनों में कई बार कहा कि विधायक दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर मतदान करें। नाथवानी यह भी याद दिला रहे हैं कि वर्ष 2008 और 2014 में वह झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे थे और तब उन्हें विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला था। इसी दावे और संख्या बल के मौजूदा गणित ने चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि 18 जून को विधानसभा के भीतर अंकगणित हावी रहता है या फिर कोई नया राजनीतिक संदेश निकलकर सामने आता है।

एसएनसीडीकेपी

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