सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश दा बना एक करोड़ का इनामी नक्सली

जमशेदपुर : भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व में शामिल नक्सली अनुज उर्फ सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश उर्फ अमलेश उर्फ प्रवेश दा पर सरकार ने एक करोड़ का इनाम घोषित किया है। इससे पहले उसपर 25 लाख रुपये का इनाम था, लेकिन अब उसे केंद्रीय कमेटी का सदस्य बनाए जाने के बाद इनाम की राशि में चार गुना से अधिक की वृद्धि की गई है।

वर्तमान में झारखंड में एक करोड़ के इनामी चार नक्सली हैं, जिनमें पोलित ब्यूरो मेंबर में मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल जी उर्फ सागर, सेट्रल कमेटी मेंबर में असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर, अनल दा उर्फ तूफान उर्फ पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश और अनुज उर्फ सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश उर्फ अमलेश हैं।

प्रवेश दा को यह पद इस वर्ष 21 अप्रैल को बोकारो में हुए मुठभेड़ में प्रयाग मांझी उर्फ विवेक की मौत के बाद सौंपा गया। प्रयाग मांझी की मौत के बाद माओवादी संगठन में नेतृत्व संकट उत्पन्न हो गया था, जिसके बाद प्रवेश को केंद्रीय कमेटी में शामिल किया गया। वह वर्तमान में पीबीपीजे (पूर्वी बिहार–पूर्वी झारखंड) का क्षेत्रीय सचिव है और संगठन विस्तार की साजिश में जुटा है।

छुड़ा लिया गया था कैदी वाहन से

प्रवेश दा मूल रूप से हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के भंडोरी गांव का निवासी है। प्रवेश दा वर्ष 2013 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब गिरिडीह में कैदी वाहन ब्रेक कांड हुआ था। उस दौरान नक्सलियों ने पुलिस की हिरासत में ले जाए जा रहे वाहन पर हमला कर कई माओवादियों को छुड़ा लिया था, जिनमें प्रवेश दा भी शामिल था। इस घटना में शामिल कई नक्सली पकड़े जा चुके हैं, परंतु प्रवेश दा अबतक पुलिस की पकड़ से बाहर है और संगठन के लिए खतरनाक योजनाएं बना रहा है।

शीर्ष नेतृत्व कमजोर, संगठन में गिरावट

पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी में अब केवल 14 सक्रिय सदस्य बचे हैं, जिनमें से मात्र चार ही पोलित ब्यूरो स्तर के नेता हैं। वर्ष 2007 से अबतक संगठन को भारी क्षति पहुंची है। 26 सेंट्रल कमेटी सदस्य या तो मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं या बीमारी से मौत हो गई। इनमें से सात को सुरक्षा बलों ने मार गिराया, जिनमें से चार इसी वर्ष मारे गए हैं।

प्रवेश दा पर एक करोड़ का इनाम रखा जाना माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं। बताया जा रहा है कि वह संगठन के पुनर्गठन और नए युवाओं को जोड़ने की कवायद में जुटा है। वह ग्रामीण इलाकों में समानांतर विचारधारा वाले नए संगठनों को खड़ा कर पुलिस और प्रशासन को भ्रमित करने की साजिश में भी शामिल है।

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