इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद फिर साथ दिखीं सोनिया और ममता, विपक्षी एकजुटता को लेकर चर्चाएं तेज

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। बंगाल चुनाव परिणाम आने के बाद यह उनका पहला दिल्ली दौरा है।

इस दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास 10 जनपथ पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई।

गौरतलब है कि 24 घंटे के अंदर यह ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की दूसरी मुलाकात है। इससे पहले सोमवार को इंडी अलायंस की बैठक में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। उस दौरान सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच गर्मजोशी भी देखने को मिली थी, जब दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया था।

देखा जाए तो ममता बनर्जी की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब टीएमसी गंभीर राजनीतिक संकट का सामना कर रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। पहले कुछ विधायकों के असंतोष की खबरें सामने आई थीं, वहीं अब पार्टी के कुछ सांसदों द्वारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की घोषणा ने टीएमसी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

दिल्ली दौरे के दौरान ममता बनर्जी ने सबसे पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। इसके बाद उनकी सोनिया गांधी से मुलाकात को विपक्षी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की हालिया बैठक में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा था कि आने वाले समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्षी एकता जरूरी है।

वहीं, टीएमसी और कांग्रेस के इतिहास पर नजर डाली जाए तो ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच संबंधों का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 1998 में ममता ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद 2011 में कांग्रेस और टीएमसी ने मिलकर वाम मोर्चा की वर्षों पुरानी सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। हालांकि इसके बाद दोनों दलों के रिश्तों में खटास आ गई और कांग्रेस के कई नेता व विधायक टीएमसी में शामिल हो गए।

वहीं, अब एक बार फिर से पश्चिम बंगाल में टीएमसी की कमजोर होती स्थिति के बीच कांग्रेस को राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने का अवसर दिखाई दे रहा है।

एसएकेडीकेपी

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