प्रथम स्वर के कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकारों ने दर्शकों का मनोरंजन किया।
प्रमुख बिंदु:
-
कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी प्रणवानंद जी महाराज को श्रद्धांजलि के साथ हुई।
-
प्रदर्शन में जमशेदपुर और कोलकाता के शास्त्रीय वादक शामिल हुए।
-
कार्यक्रम समापन तक दर्शक मंत्रमुग्ध रहे।
जमशेदपुर – प्रथम स्वर द्वारा आयोजित दूसरे वार्षिक शास्त्रीय संगीत सम्मेलन में प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिससे श्रोता पूरी शाम मंत्रमुग्ध रहे।
7 दिसंबर, 2024 को भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी वेदानंद सांस्कृतिक हॉल में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत युगाचार्य स्वामी प्रणवानंद जी महाराज को श्रद्धांजलि के साथ हुई।
शाम की शुरुआत जमशेदपुर के प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायक और श्रद्धेय गुरु बीरेंद्र उपाध्याय के प्रदर्शन से हुई।
अपने छात्रों के साथ, उन्होंने रागमाला की एक भावपूर्ण प्रस्तुति प्रस्तुत की, जिससे कार्यक्रम में एक शांत स्वर स्थापित हो गया।
प्रशंसित कलाकारों द्वारा प्रदर्शन
कोलकाता के कलाकार और पंडित दीपक चौधरी के शिष्य सुभब्रत चटर्जी ने अगला मंच संभाला।
उन्होंने राग पटदीप में मनमोहक व्यक्तिगत रचनाएँ प्रस्तुत कीं और उसके बाद राग किरवानी में एक मध्यलय बंदिश प्रस्तुत की।
तबले पर श्री संग्राम रॉय की लयबद्ध संगत ने उनके प्रदर्शन को और ऊंचा कर दिया।
सुभब्रत की रचनाओं में ऊर्जा और सटीकता ने दर्शकों की जोरदार तालियाँ बटोरीं।
इसके बाद, कोलकाता के गायक अयान रॉयचौधरी ने राग भूपाली में ख्याल और एक भक्ति भजन की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी।
अयान, पद्म भूषण पंडित के शिष्य हैं। अजय चक्रवर्ती, उस्ताद मुबारक अली खान और उस्ताद मशकूर अली खान ने अपनी त्रुटिहीन गायन रेंज और नियंत्रण से दर्शकों को प्रभावित किया।
उनके साथ तबले पर स्वरूप मोइत्रा और हारमोनियम पर संजय बिस्वास ने संगत की, जिससे सुर और लय का उत्तम सामंजस्य बना।
ग्रैंड फिनाले
शाम के अंतिम प्रदर्शन में श्री सुभाष बोस और अशोक सिंह की शानदार सितार और बांसुरी की जोड़ी प्रस्तुत की गई।
इस जोड़ी ने शास्त्रीय संगीत की भव्यता का सार प्रस्तुत करते हुए राग मारू बिहाग और भैरवी प्रस्तुत किया।
अमिताव सेन की तबला संगत द्वारा समर्थित उनके जटिल तालमेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दोनों द्वारा बजाया गया प्रत्येक स्वर शालीनता से गूंज उठा, जिससे कार्यक्रम एक उपयुक्त और अविस्मरणीय निष्कर्ष पर पहुंच गया।
सराहना और खचाखच भरे दर्शक
कार्यक्रम का सुचारू संचालन श्री सुजीत रॉय ने किया, जिन्होंने अपनी वाक्पटुता से खचाखच भरे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने कलाकारों और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद प्रस्ताव भी दिया।
प्रथम स्वर के सचिव देवार्घ्य रॉय, सहायक सचिव कार्तिक कर्मकार और कोषाध्यक्ष कृष्णेंदु पॉल ने सभी समर्थकों और शुभचिंतकों की सराहना की।
श्री अनिरुद्ध सेन, श्रीमती सहित जमशेदपुर की कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ। विभा मिश्रा, श्री सत्य प्रकाश तिवारी, श्री हरप्रसाद मुखर्जी, श्री पंकज झा, श्री अनिल सिंह और श्री नूपुर गोस्वामी ने आयोजन में अपना सहयोग दिया।
एक संगीत प्रेमी ने टिप्पणी की, “यह देखकर खुशी होती है कि इस तरह के आयोजन हमारे शहर में शास्त्रीय संगीत के प्रति जुनून को पुनर्जीवित करते हैं।”
सम्मेलन ने न केवल भारत की समृद्ध शास्त्रीय विरासत का जश्न मनाया बल्कि जमशेदपुर के सांस्कृतिक ताने-बाने को भी मजबूत किया।
