इस कार्यक्रम में कई भाषाओं में साहित्यिक पाठन और एक हिंदी लघु कहानी संग्रह का लॉन्च शामिल है।
प्रमुख बिंदु:
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तुलसी भवन में मनाई गई बालमुकुंद गुप्ता जयंतीजमशेदपुर.
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वरिष्ठ लेखक शीतल प्रसाद दुबे द्वारा लिखित “रजनी का स्वप्न” का विमोचन।
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जीवंत साहित्यिक गोष्ठी में 35 कवियों ने बहुभाषी रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
जमशेदपुर – लोकमंच कार्यक्रम और प्रसिद्ध हिंदी लेखक बालमुकुंद गुप्ता की जयंती के अवसर पर तुलसी भवन के प्रयाग हॉल में साहित्य का एक भव्य उत्सव मनाया गया। इस कार्यक्रम में अनुभवी लेखक शीतल प्रसाद दुबे के नए हिंदी लघु कहानी संग्रह का भी विमोचन हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत नीता सागर चौधरी की सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। अतिथियों ने बालमुकुंद गुप्ता के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी, साथ ही नीलिमा पांडे ने उनकी संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत की. डॉ. उदय प्रताप हयात और डॉ. यमुना तिवारी “व्यथित” जैसे प्रसिद्ध साहित्यकारों ने विचारशील समीक्षाओं और काव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से गुप्ता और दुबे की विरासत पर प्रकाश डाला।
बाद में 35 कवियों ने हिंदी, भोजपुरी, बांग्ला और संस्कृत आदि भाषाओं में रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया। उल्लेखनीय कवियों में शीतल प्रसाद दुबे, मंजू कुमारी और ब्रजेंद्र नाथ मिश्र शामिल हैं, जिन्होंने विविध सांस्कृतिक समृद्धि प्रस्तुत की। डॉ. संजय पाठक “सनेही” और रीना सिन्हा “सलोनी” ने भी गहरे साहित्यिक जुड़ाव को दर्शाते हुए अपनी कविताएँ साझा कीं।
मुख्य उपस्थित लोगों में तुलसी भवन के सचिव डॉ. अजय कुमार ओझा और महेंद्र तिवारी और बेबी पांडे जैसी प्रमुख सांस्कृतिक हस्तियां शामिल थीं। कार्यक्रम का समापन ट्रस्टी अरुण कुमार तिवारी के हार्दिक धन्यवाद के साथ हुआ।
