जमशेदपुर पूर्वी विधायक ने फार्मेसी काउंसिल की नियुक्ति में अनियमितता का आरोप लगाया
प्रमुख बिंदु:
• सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री पर अयोग्य उम्मीदवार की नियुक्ति का आरोप लगाया
• राहुल कुमार की फार्मेसी डिग्री की प्रामाणिकता पर सवाल उठे
• फार्मेसी काउंसिल के वित्तीय रिकॉर्ड की तत्काल ऑडिट की मांग
जमशेदपुर- जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। बन्ना गुप्ता एक महत्वपूर्ण नियुक्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर।
रॉय का दावा है कि गुप्ता ने झारखंड फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार-सह-सचिव के पद पर एक अयोग्य व्यक्ति की नियुक्ति का निर्देश दिया था।
विधायक ने आरोप लगाया कि मंत्री ने नियुक्ति में स्थापित प्रक्रियाओं की अनदेखी की है।
उम्मीदवार की योग्यता का आकलन करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया।
रॉय ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “समिति की रिपोर्ट धोखाधड़ी वाली प्रतीत होती है।”
उन्होंने वाईबीएन विश्वविद्यालय से राहुल कुमार की फार्मेसी की डिग्री की वैधता पर सवाल उठाया।
रॉय ने कुमार के रोल नंबर और प्रोजेक्ट शीर्षक में विसंगतियों को उजागर किया।
फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष ने वाईबीएन यूनिवर्सिटी से स्पष्टीकरण मांगा है।
रॉय ने कहा, “ऐसा प्रतीत होता है कि राहुल कुमार की डिग्री फर्जी है।”
विधायक ने मंत्री पर कथित धोखाधड़ी को छुपाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि जांच समिति ने महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी की है।
रॉय ने कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक अनियमितता का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “कुमार के बहनोई पिछले रजिस्ट्रार-सह-सचिव थे।”
विधायक ने फार्मेसी काउंसिल के वित्त का तत्काल ऑडिट कराने की मांग की।
रॉय का मानना है कि ऑडिट से बड़े पैमाने पर वित्तीय भ्रष्टाचार भी उजागर होगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि ऑडिट के माध्यम से मंत्री की संलिप्तता का खुलासा हो सकता है।
विधायक ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले में कार्रवाई करने का आग्रह किया।
रॉय के आरोपों से झारखंड के राजनीतिक हलकों में विवाद छिड़ गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने इन गंभीर आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
यह मामला सरयू राय और बन्ना गुप्ता के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद के साथ-साथ सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
