झारखंड में सहारा इंडिया के बंद कार्यालयों को खोलने की मांग तेज, सरायकेला में एजेंटों ने उपायुक्त से की मुलाकात== निवेशकों का भुगतान अटका, एजेंटों ने कहा – अन्य राज्यों में जारी है प्रक्रिया

जमशेदपुर: झारखंड में सहारा इंडिया कार्यालयों को खोलने की मांग अब संगठित और व्यापक रूप लेती नजर आ रही है। प्रशासन और राज्य सरकार पर अब यह दबाव बढ़ रहा है कि वह निवेशकों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करे, ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

इसी क्रम में बुधवार को सरायकेला परिक्षेत्र के सहारा इंडिया एजेंट और अधिकारी जिला मुख्यालय पहुंचे और, सरायकेला खरसावां जिले के उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं।

सहारा इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी संजय कुमार राय ने बताया कि देशभर में सहारा इंडिया के कार्यालय खुले हैं और वहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सीआरसी पोर्टल के माध्यम से निवेशकों को भुगतान भी किया जा रहा है।

लेकिन झारखंड में पिछले नौ माह से डीजीपी के निर्देश पर सभी कार्यालय बंद हैं, जिससे निवेशकों को अपने त्रुटियों का समाधान कराने का कोई माध्यम नहीं मिल पा रहा है। नतीजतन उनका भुगतान अटका हुआ है।

संजय राय ने बताया कि उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और इस दिशा में जल्द सार्थक पहल का भरोसा भी दिलाया।

राज्यभर में शुरू हुआ है जिला स्तरीय आंदोलन
ज्ञात हो कि सहारा इंडिया के एजेंटों और अधिकारियों ने झारखंड के विभिन्न जिला मुख्यालयों का रुख करना शुरू कर दिया है।

सभी जिलों में उपायुक्तों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा जा रहा है ताकि कार्यालयों को दोबारा खोला जा सके और भुगतान प्रक्रिया शुरू हो।

जमशेदपुर में भाजपा का समर्थन
इससे पहले मंगलवार को जमशेदपुर महानगर भाजपा जिला अध्यक्ष सुधांशु ओझा के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उपायुक्त करण सत्यार्थी से मुलाकात की थी और सहारा इंडिया कार्यालयों को खोलने की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा था।
ओझा ने सहारा इंडिया के निवेशकों की समस्याओं को गंभीर मुद्दा बताया और कहा कि राज्य सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर सभी कार्यालयों को खोलने की अनुमति देनी चाहिए, ताकि निवेशकों को उनका पैसा वापस मिल सके।

निवेशकों को भुगतनी पड़ रही कीमत
एजेंटों ने बताया कि कार्यालय बंद होने के कारण निवेशकों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।

पोर्टल पर छोटी-छोटी त्रुटियों को सुधारने के लिए भी जब तक कार्यालय नहीं खुलते, तब तक कोई रास्ता नहीं है।

ऐसे में झारखंड के लाखों निवेशक भुगतान प्रक्रिया से वंचित रह जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में भुगतान प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी है।

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