September 8, 2026
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जमशेदपुर

टाटानगर स्टेशन पर शव के साथ प्रदर्शन, मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर हंगामा

टाटानगर स्टेशन पर शव के साथ प्रदर्शन, मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर हंगामा

लाठीचार्ज कर पुलिस ने भीड़ को हटाने का प्रयास किया, अपनी मांगों पर अड़े परिजन

30 मई को वंदे भारत ट्रेन की मरम्मत के दौरान आशीष की करंट से हो गई थी मौत

जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे स्टेशन की वाशिंग लाइन में करंट लगने से गंभीर रूप से झुलसे टेक्नीशियन आशीष माझी की मौत के बाद मंगलवार को स्टेशन परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजन, स्थानीय लोग और समर्थक शव के साथ स्टेशन पहुंचे और रेलवे प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने आशीष माझी के परिवार को उचित मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी प्रदान करने तथा दुर्घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई। इस दौरान रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई और स्टेशन परिसर में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।

शव के साथ स्टेशन पहुंचे लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेल पुलिस और आरपीएफ के जवानों को मौके पर तैनात किया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया, जिससे कुछ देर के लिए स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

फिलहाल रेलवे प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। घटना को लेकर स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

गौरतलब है कि 30 मई को वंदे भारत एक्सप्रेस की मरम्मत के दौरान टाटानगर रेलवे स्टेशन की वाशिंग लाइन में कार्यरत टेक्नीशियन आशीष माझी करंट की चपेट में आ गए थे। हादसे के बाद उन्हें तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) रेफर किया गया था।

करीब एक सप्ताह तक अस्पताल में जीवन और मृत्यु से संघर्ष करने के बाद शनिवार रात उनकी मौत हो गई। आशीष माझी अविवाहित थे और परिवार के बड़े बेटे थे। उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

परिजनों का आरोप है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ। उनका कहना है कि रेलवे प्रशासन को दुर्घटना की जिम्मेदारी लेते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना चाहिए। हालांकि, इस मामले में रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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