![]()
पटना, 10 जून (आईएएनएस)। बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को आरोप लगाया कि एनडीए सरकार के शासन में राज्य गंभीर वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राज्य वित्तीय आपातकाल जैसी स्थिति के करीब पहुंच रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट के माध्यम से ‘डबल इंजन’ वाली सरकार की आलोचना की और उस पर ‘जनविरोधी’ और ‘कॉर्पोरेट समर्थक’ नीतियां लागू करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नींतियों के कारण राज्य आर्थिक संकट में डूब गया है।
तेजस्वी यादव की यह टिप्पणी बिहार मंत्रिमंडल द्वारा मई, जून और जुलाई महीनों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान करने के लिए बिहार आकस्मिक निधि से 3,662 करोड़ रुपए निकालने की मंजूरी के बाद आई है।
आकस्मिक निधि का उपयोग आम तौर पर सरकारों द्वारा प्राकृतिक आपदाओं, आपात स्थितियों या वित्तीय संकटों सहित अप्रत्याशित परिस्थितियों से उत्पन्न होने वाले तत्काल खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
बिहार सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर राज्य को पेंशन बांटने के लिए भी आपातकालीन फंड पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो राज्य की गंभीर वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि बिहार का वित्तीय संकट इतना गंभीर हो गया है कि राज्य सरकार को पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिक निधि से 3,662 करोड़ रुपए निकालने पड़े हैं। आप कल्पना कर सकते हैं कि स्थिति कितनी चिंताजनक और खतरनाक हो गई है।
राजद नेता ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी खजाने में कमी के कारण राज्य में वेतन और पेंशन संबंधी भुगतान कई महीनों से लंबित हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ठेकेदारों का भुगतान एक साल से अधिक समय से रुका हुआ है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हम (राजद) पिछले छह महीनों से कहते आ रहे हैं कि सरकारी खजाने में कमी के कारण कर्मचारियों के वेतन और पेंशन संबंधी भुगतान में देरी हो रही है। ठेकेदारों को एक साल से अधिक समय से भुगतान नहीं किया गया है।
तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर विकास योजनाओं और कल्याणकारी पहलों को लागू करने में विफल रहने का भी आरोप लगाया।
राजद नेता के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान स्वीकृत विकास परियोजनाएं अभी तक शुरू नहीं हुई हैं, जबकि हाल ही में घोषित कई योजनाएं केवल घोषणाओं तक ही सीमित हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिहार में बार-बार बिजली कटौती हो रही है, छात्रवृत्ति वितरण में देरी हो रही है और छात्र क्रेडिट कार्ड योजना ठप्प पड़ी है।
विपक्षी नेता ने यह भी दावा किया कि राज्य मंत्रिमंडल ने निधि की कमी के कारण बिहार राज्य फसल सहायता योजना बंद कर दी है।
एमएस
