तरकुल बना ग्रामीणों की अतिरिक्त आय का मजबूत जरिया

जमशेदपुर के गांवों में मौसमी फल की बढ़ी मांग, बढ़ा मुनाफा

मुख्य बिंदु:

  • तरकुल की बिक्री से ग्रामीणों को अतिरिक्त आय मिल रही
  • एक परिवार 15 दिनों में 15 हजार तक कमा रहा
  • शहरी बाजारों में फल की मांग लगातार बढ़ी

जमशेदपुर – ताड़ के पेड़ों से मिलने वाला तरकुल फल इन दिनों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

गर्मी के मौसम में तरकुल की मांग बढ़ गई है। ग्रामीण सुबह तड़के फल तोड़ते हैं।

इसके बाद ग्रामीण इसे शहर के बाजारों में बेचते हैं। खरीदारों की अच्छी संख्या देखी जा रही है।

स्थानीय विक्रेताओं के अनुसार एक तरकुल 15 से 20 रुपये में बिकता है। इससे ग्रामीणों को बेहतर आमदनी मिल रही है।

वहीं, पहले बाहरी व्यापारी गांवों से फल खरीदते थे। अब ग्रामीण स्वयं बाजार तक पहुंच रहे हैं।

इसके अलावा सीधे बिक्री करने से मुनाफा बढ़ा है। ग्रामीणों को पहले से अधिक लाभ मिल रहा है।

जानकारी के अनुसार इसका सीजन लगभग 15 दिनों का रहता है। इस दौरान अच्छी कमाई हो जाती है।

उधर, एक परिवार इस अवधि में 12 से 15 हजार रुपये कमा लेता है। इससे मौसमी रोजगार भी बढ़ा है।

दूसरी ओर, झारखंड में ताड़ और खजूर के पेड़ बड़ी संख्या में हैं। यहां की जलवायु इनके लिए अनुकूल मानी जाती है।

ग्रामीणों का मानना है कि प्रसंस्करण को बढ़ावा मिलना चाहिए। विपणन सुविधाएं भी मजबूत की जानी चाहिए।

इसी बीच, विशेषज्ञ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानते हैं। इससे रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।

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