जमशेदपुर। बागबेड़ा ग्रामीण जलापूर्ति योजना को लेकर चल रहे जन आंदोलन ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष एवं आंदोलनकारी सुबोध झा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने योजना के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान समिति की संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन भी मौजूद रहीं। निरीक्षण दल में छोटे राय मुर्मू, कृष्ण चंद्र पात्रो, प्रभा हांसदा, महेश सिंह, संतोष जायसवाल, रामेश्वर प्रसाद, पवित्र पांडे, सौरभ कुमार, अखिलेश कुमार, अजय शर्मा और कन्हैया पांडे समेत कई लोग शामिल थे।निरीक्षण के बाद सुबोध झा ने आरोप लगाया कि 29 मई 2026 को जारी रिपोर्ट में जून माह के भीतर जलापूर्ति शुरू करने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि योजना के कई कार्य अब भी अधूरे पड़े हैं और 15 जून तक लोगों को पानी मिलना संभव नहीं दिख रहा। उन्होंने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों पर जनता तथा न्यायालय को गुमराह करने का आरोप लगाया।दुखनी सोरेन ने कहा कि जब तक योजना पूरी तरह चालू नहीं हो जाती, तब तक वे अपने निजी टैंकरों के माध्यम से क्षेत्रवासियों को पानी उपलब्ध कराती रहेंगी। उन्होंने बताया कि योजना में कथित भ्रष्टाचार और निर्माण संबंधी अनियमितताओं के खिलाफ जन जागरण अभियान चलाया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर विधानसभा घेराव और पदयात्रा भी की जाएगी।निरीक्षण के दौरान फिल्टर प्लांट, इंटक वेल और अन्य संरचनाओं में निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। समिति का आरोप है कि कई जगहों पर दीवारों में दरारें दिखाई दीं, प्लास्टर कमजोर पाया गया तथा निर्माण कार्य को रंग-रोगन कर छिपाने का प्रयास किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने और कथित भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की मांग की है। समिति का कहना है कि यदि जल्द ठोस प्रगति नहीं हुई तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
