जमशेदपुर: डॉक्टर की लापरवाही से एक मासूम की जान चली गई। इस मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया। पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने सदर अस्पताल में मलेरिया से पीड़ित एक गंभीर बच्ची की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। जांच में ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद संबंधित चिकित्सक के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई की सिफारिश भेजी गई है।
सोमवार को मलेरिया नियंत्रण अभियान को लेकर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि सदर अस्पताल में भर्ती कराई गई एक गंभीर मलेरिया संक्रमित बच्ची को समय पर चिकित्सकीय देखभाल नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी।
इस समिति में अपर समाहर्ता (एडीसी) अनुराग तिवारी, धालभूम अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) अर्नव मिश्रा और सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल को शामिल किया गया था।
समिति ने अस्पताल का निरीक्षण करने के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रिकॉर्ड, संबंधित कर्मचारियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच की।
जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. अमित कुमार ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती। रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची को रात में गंभीर अवस्था में भर्ती कराया गया था, लेकिन पूरी रात चिकित्सक उसे देखने वार्ड तक नहीं पहुंचे।
इतना ही नहीं, ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ द्वारा मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी दिए जाने के बावजूद डॉक्टर ने आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप नहीं किया। जांच समिति ने इसे चिकित्सकीय दायित्वों की गंभीर अनदेखी माना है।
उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी।
मलेरिया को लेकर प्रशासन अलर्ट
उपायुक्त ने बताया कि जिले में मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार व्यापक अभियान चला रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर सर्वे, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी), दवाओं का वितरण, फॉगिंग, मच्छररोधी उपाय तथा जागरूकता अभियान तेज किए गए हैं। विशेष रूप से पोटका, डुमरिया, मुसाबनी, घाटशिला और अन्य संवेदनशील इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या लगातार कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
मलेरिया की समय पर पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं तथा मृत्यु के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है। जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य संस्थानों को भी निर्देश दिया है कि गंभीर मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और सभी चिकित्सक निर्धारित प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें।
इलाज में लापरवाही पर परिजन कर सकते शिकायत
किसी भी मरीज की इलाज के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से मौत हो जाती है। मौत में लापरवाही की पुष्टि हो जाती है तो IPC की धारा 304 A
के तहत केस किया जा सकता है। डॉक्टर के दोषी पाये जाने पर दो साल की जेल या जुर्माना भी हो सकता है।
