जमशेदपुर: ब्रजवंदना फाउंडेशन ने ईएसआईसी (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) की गोलमुरी शाखा में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। फाउंडेशन का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी और दोषियों पर उचित कार्रवाई संभव होगी।
साकची में आयोजित प्रेसवार्ता में व्यापारी समुदाय, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और शिकायतकर्ताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि ईएसआईसी गोलमुरी शाखा में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि बीमाधारकों, श्रमिकों और नियोक्ताओं को लंबे समय से अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ब्रजवंदना फाउंडेशन के अध्यक्ष भास्कर कुमार ने आरोप लगाया कि ईएसआईसी गोलमुरी के पूर्व शाखा प्रबंधक सहित कुछ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कर्मचारियों, बीमाधारकों और नियोक्ताओं को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 से जुलाई 2026 के बीच इस मामले से संबंधित शिकायतें केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी), प्रधानमंत्री कार्यालय, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, राज्यपाल, लोकायुक्त, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित अन्य सक्षम प्राधिकारियों को भेजी जा चुकी हैं।
भास्कर कुमार ने अपने और अपने परिवार पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि उन्हें ईएसआईसी की सभी सुविधाएं नियमों के अनुरूप मिली हैं तथा उनके सभी दावों का निपटारा विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें और उनके परिवार को मानसिक एवं सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की कि जिन अधिकारियों का इस दौरान स्थानांतरण हो चुका है, उनके कार्यकाल की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही शिकायतकर्ताओं और गवाहों को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न की जाए।
प्रेसवार्ता में मौजूद प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि ईएसआईसी की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में लगाए गए आरोप गलत साबित होते हैं तो वे उसका सम्मान करेंगे, लेकिन यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही बीमाधारकों, श्रमिकों और नियोक्ताओं को बिना किसी अवैध मांग के समयबद्ध और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।