जमशेदपुर/ नई दिल्ली: जमशेदपुर समेत झारखंड के ज्यादातर शहरों में प्याज 50 से लेकर 55 रुपये प्रति किलो बिक रही है। लोग महंगाई से परेशान हैं। इसी बीच देश में प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सप्लाई बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। महाराष्ट्र के नासिक से बड़े खपत वाले शहरों तक रेलवे के विशेष रैक ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए प्याज का बफर स्टॉक भेजा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बाजार में उपलब्धता बढ़ाकर मौसमी तेजी को नियंत्रित करना है।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने सोमवार को बताया कि रेलवे रैक में लोड किया जा रहा प्याज बुधवार तक चिन्हित खपत केंद्रों तक पहुंचने की उम्मीद है। शुरुआत में पांच प्रमुख शहरों—चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी—में इसकी आपूर्ति की जाएगी। जरूरत के मुताबिक बाद में अन्य शहरों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
एक साल में 59 फीसदी बढ़ी खुदरा कीमत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर करीब 59 फीसदी बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। पिछले साल इसी तारीख को यह कीमत 27.37 रुपये प्रति किलो थी।
इसी तरह प्याज की औसत थोक कीमत भी करीब 68 फीसदी बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गई, जबकि एक साल पहले यह 21.23 रुपये प्रति किलो थी।
प्रमुख शहरों में भी प्याज महंगा हुआ है। सोमवार को चेन्नई में इसकी खुदरा कीमत 60 रुपये, दिल्ली में 55 रुपये और कोलकाता में 53 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई।
35 रुपये किलो में मिलेगा प्याज
सरकार नासिक में मौजूद बफर स्टॉक को रेल रैक के जरिए बड़े पैमाने पर खपत वाले केंद्रों तक पहुंचा रही है। इन शहरों के थोक और खुदरा बाजारों में स्टॉक उतारा जाएगा।
उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एनसीसीएफ और नाफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से प्याज 35 रुपये प्रति किलो की दर पर खुदरा बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार कीमतों और बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
निधि खरे ने कहा कि नासिक की मंडियों में प्याज की कीमतें दिल्ली से अधिक होना सामान्य बाजार स्थिति नहीं है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में बाजार में जमाखोरी, गुटबाजी या सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों की भी आशंका हो सकती है।
सरकार के पास 1.21 लाख टन बफर स्टॉक
केंद्र सरकार के पास चालू वर्ष के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है। यह रणनीतिक भंडार प्याज की सप्लाई में कमी होने पर कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए तैयार किया जाता है।
इस स्टॉक की खरीद मुख्य रूप से मूल्य स्थिरीकरण व्यवस्था के तहत नाफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियों के जरिए की जाती है। जरूरत के समय इसे बाजार में चरणबद्ध तरीके से उतारा जाता है।
सरकार का कहना है कि आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त रहने की उम्मीद है।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में अगस्त और सितंबर के दौरान अक्सर मौसमी तेजी देखने को मिलती है। त्योहारी मांग, मौसम संबंधी बाधाएं, सप्लाई चेन में बदलाव और खपत के पैटर्न में परिवर्तन इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।
सरकार ऐसे समय में बफर स्टॉक को प्रमुख मंडियों और खपत वाले क्षेत्रों में भेजती है। स्टॉक की मात्रा और किन शहरों में इसे जारी किया जाना है, इसका फैसला बाजार की कीमतों और आपूर्ति की स्थिति की लगातार निगरानी के आधार पर किया जाता है।
2025-26 में 86 रेल रैक से पहुंचा 88 हजार टन प्याज
‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल का उद्देश्य बड़े पैमाने पर प्याज की ढुलाई के लिए रेलवे की लॉजिस्टिक क्षमता का इस्तेमाल करना है। इसे 2024-25 में शुरू किया गया था।
पहले साल 14 रेल रैक के जरिए करीब 12 हजार टन बफर स्टॉक पांच शहरों तक पहुंचाया गया था। इसके बाद 2025-26 में इस व्यवस्था का विस्तार हुआ और 86 रेल रैक के जरिए करीब 88 हजार टन प्याज देश के 16 बड़े शहरों तक पहुंचाया गया।
सरकार अब इसी व्यवस्था के जरिए बढ़ती कीमतों के बीच बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश कर रही है।
हालांकि आम लोगों में यही चर्चा है केंद्र सरकार की पहल के बावजूद उन्हें कब तक इन बढ़ती कीमतों से राहत मिलेगी। केंद्र सरकार भले की भरपूर स्टॉक का दावा कर रही है कि जनता को कीमत घटने के बाद ही राहत मिलेगी।