मझगांव: झारखंड सरकार के उसे दावे की पोल खुल गई है जिसमें गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज समेत सभी सेवाएं मुफ्त हैं। एंबुलेंस सेवा की स्थिति तो और बदतर है।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव थाना क्षेत्र में वज्रपात से हुई एक युवक की मौत के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पोस्टमार्टम के लिए सरकारी वाहन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण मृतक के परिजनों को घंटों तक परेशान होना पड़ा और अंततः चंदा जुटाकर निजी वाहन से शव को चाईबासा सदर अस्पताल ले जाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, चतरिसाई गांव निवासी 25 वर्षीय विक्की पिंगुवा की रविवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। परिजन उन्हें तत्काल मझगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
सूचना मिलने पर मझगांव पुलिस भी अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद शव पूरी रात अस्पताल परिसर में ही रखा रहा।
सोमवार सुबह शव को पोस्टमार्टम के लिए चाईबासा सदर अस्पताल भेजा जाना था, लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस या प्रशासन की ओर से शव ले जाने के लिए किसी प्रकार की वाहन व्यवस्था नहीं की गई।
सुबह करीब नौ बजे तक वाहन नहीं मिलने पर परिजन लगातार प्रशासन से मदद की गुहार लगाते रहे। आरोप है कि पुलिस ने भी स्पष्ट कर दिया कि थाना की ओर से वाहन उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे परिजनों में नाराजगी बढ़ गई।
मामले की जानकारी मिलने पर समाजसेवी प्रदीप हेंब्रम और मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद फैय्याज अहमद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
प्रदीप हेंब्रम ने कहा कि मृतक का परिवार बेहद गरीब है और मजदूरी कर अपना जीवनयापन करता है। प्राकृतिक आपदा में युवक की मौत होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी। उनका कहना था कि ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन को मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए हरसंभव सहायता उपलब्ध करानी चाहिए थी।
मुखिया प्रतिनिधि मोहम्मद फैय्याज ने भी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा में मृतकों के परिवारों को सरकार की ओर से राहत और सहयोग का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में पुलिस और प्रखंड प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली।
उन्होंने बताया कि घटना के करीब 16 घंटे बाद तक शव पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा जा सका, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
परिजनों के अनुसार, सुबह करीब 10 बजे तक भी प्रशासन से कोई सहायता नहीं मिलने पर उन्हें मजबूरी में रिश्तेदारों और ग्रामीणों से चंदा जुटाकर लगभग चार से पांच हजार रुपये की व्यवस्था करनी पड़ी।
इसके बाद निजी वाहन से शव को पोस्टमार्टम के लिए चाईबासा सदर अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है।
आक्रोशित लोगों ने कहा कि सरकार की सारी सेवाएं समर्थ लोगों के लिए है। किसी भी सरकारी अस्पताल में स्थिति देखी जा सकती है।
