टाटा स्टील बनी ‘डिजिटल-फर्स्ट’ कंपनी, ई-कॉमर्स बिक्री 1 अरब डॉलर के पार

जमशेदपुर/मुंबई : टाटा स्टील ने खुद को सफलतापूर्वक एक “डिजिटल-फर्स्ट इंडस्ट्रियल एंटरप्राइज” के रूप में स्थापित कर लिया है। कंपनी के ई-कॉमर्स कारोबार में जबरदस्त वृद्धि के चलते यह बदलाव संभव हुआ है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड रिपोर्ट के अनुसार, टाटा स्टील के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘आशियाना’ और ‘डिजीईसीए’ (DigiECA) ने संयुक्त रूप से 9,360 करोड़ रुपये का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) हासिल किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत अधिक है।

रिपोर्ट में शेयरधारकों को संबोधित करते हुए टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि तकनीक और डिजिटल परिवर्तन अब कंपनी की सहायक पहल नहीं, बल्कि उसकी कार्य संस्कृति और संचालन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

कंपनी के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की वार्षिक बिक्री 1 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुकी है, जिससे खुदरा और लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) क्षेत्रों में टाटा स्टील की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

एआई और इंडस्ट्री 4.0 से बढ़ी दक्षता

उपभोक्ताओं तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ टाटा स्टील ने अपने संपूर्ण वैल्यू चेन में 860 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल लागू किए हैं। इनका उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, सुरक्षा सुधारने और ऊर्जा दक्षता में वृद्धि के लिए किया जा रहा है।

डिजिटल परिवर्तन के परिणामस्वरूप संयंत्र संचालन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है:

एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस के कारण महत्वपूर्ण मशीनों में होने वाली देरी और डाउनटाइम में 92 प्रतिशत की कमी आई है।

कंपनी की 78 प्रतिशत विनिर्माण इकाइयों को विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग लाइटहाउस’ के रूप में मान्यता प्राप्त है।

टाटा स्टील के स्वामित्व वाले ‘DATOM’ फ्रेमवर्क के माध्यम से 98 प्रतिशत प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPI) की परिभाषाओं का मानकीकरण किया गया है, जिससे कॉर्पोरेट रिपोर्टिंग पूरी तरह स्वचालित और सिस्टम-आधारित हो गई है।

कलिंगानगर और एनआईएनएल से घरेलू विस्तार को मिलेगी गति

डिजिटल विकास के साथ-साथ टाटा स्टील अपने भौतिक बुनियादी ढांचे का भी तेजी से विस्तार कर रही है। हाल ही में कंपनी ने 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से कलिंगानगर संयंत्र के फेज-2 विस्तार का उद्घाटन किया है।

इसमें देश की सबसे बड़ी ब्लास्ट फर्नेस और अत्याधुनिक कोल्ड रोलिंग मिल स्थापित की गई है, जिससे ऑटोमोबाइल और रक्षा जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों पर कंपनी का फोकस और मजबूत होगा।

इसके अलावा, कंपनी के निदेशक मंडल ने नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (NINL) के टाटा स्टील में विलय को मंजूरी दे दी है। यह प्रक्रिया वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरी होने की संभावना है।

चालू वित्तीय वर्ष में एनआईएनएल ने 27 प्रतिशत EBITDA मार्जिन दर्ज किया है और कच्चे इस्पात एवं सिंटर उत्पादन में रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है। कंपनी ने नीलाचल परिसर में 4.8 एमटीपीए क्षमता वाले फेज-1 विस्तार की प्रारंभिक साइट विकास प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

वैश्विक चुनौतियां और ग्रीन स्टील की दिशा में कदम

चंद्रशेखरन ने कहा कि बुनियादी ढांचा, निर्माण और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की मजबूत मांग के कारण घरेलू बाजार स्थिर बना हुआ है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट जैसी वैश्विक परिस्थितियां निकट भविष्य में आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।

यूरोप में भी टाटा स्टील अपने कारोबार में बड़े बदलाव कर रही है। ब्रिटेन में कंपनी ने पोर्ट टैलबोट में 1.25 अरब पाउंड की लागत वाली इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) परियोजना की आधारशिला रखी है, जो ग्रीन स्टील उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वहीं, नीदरलैंड्स में कंपनी आईजमुइडेन संयंत्र के टिकाऊ भविष्य को लेकर डच सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है।

भविष्य की रणनीति के तहत टाटा स्टील पारंपरिक कमोडिटी हॉट-रोल्ड कॉइल उत्पादों पर निर्भरता कम करते हुए ट्यूब, टिनप्लेट, कोटेड स्टील और वायर जैसे उच्च मार्जिन एवं मूल्यवर्धित उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करेगी।

मजबूत डिजिटल प्लेटफॉर्म और व्यापक वितरण नेटवर्क के बल पर कंपनी एक पारंपरिक इस्पात आपूर्तिकर्ता से आगे बढ़कर एक समग्र समाधान प्रदाता (इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस पार्टनर) बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

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