रांची : झारखंड में तांबे के कचरे से यूरेनियम निकालने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए परमाणु ऊर्जा विभाग की कंपनी यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL) और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) के बीच समझौता हुआ है। UCIL इसके लिए झारखंड में एक विशेष रिकवरी प्लांट लगाएगी।
यह कदम देश में परमाणु ऊर्जा और रक्षा जरूरतों के लिए घरेलू यूरेनियम की आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
कंपनियों के बीच समझौता
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के सीएमडी संजीव कुमार सिंह ने बताया कि दोनों कंपनियों के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर सहमति बन गई है। समझौते के तहत HCL तांबा निकालने के बाद बचने वाले कचरे (टेलिंग्स) को UCIL को सौंपेगी।
कचरे से निकाला जाएगा यूरेनियम
तांबा अयस्क को साफ करने के बाद जो बारीक कचरा और पानी बचता है, उसे टेलिंग्स कहते हैं। HCL के इस कचरे में यूरेनियम के अंश पाए गए हैं। UCIL ने इस प्रस्ताव को तकनीकी रूप से मंजूरी दे दी है। अब आधुनिक तकनीक की मदद से इस कचरे से यूरेनियम अलग किया जाएगा।
कड़े सुरक्षा नियमों का होगा पालन
UCIL इस कचरे की प्रोसेसिंग करके यूरेनियम निकालेगी। यूरेनियम निकालने के बाद बचा हुआ बाकी कचरा वापस HCL को लौटा दिया जाएगा। यूरेनियम एक परमाणु खनिज है, इसलिए इस पूरी प्रक्रिया में परमाणु ऊर्जा विभाग के कड़े सुरक्षा नियमों और सरकारी प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।
देश को होगा दोहरा फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से देश को रणनीतिक और पर्यावरणीय मोर्चे पर बड़ा फायदा होगा। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर यूरेनियम विदेशों से आयात करता है। इस पहल से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। साथ ही, खनन के कचरे का सही इस्तेमाल होने से पर्यावरण को भी फायदा होगा।
100 गीगावाट ऊर्जा का लक्ष्य और HCL का मुनाफा
भारत सरकार ने साल 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। सरकार इसके लिए घरेलू स्तर पर यूरेनियम का उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
इस बीच, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड ने मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में 444.27 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। यह पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 137.3 प्रतिशत अधिक है। कंपनी ने अगले पांच सालों में अपनी खदानों के विस्तार के लिए 7,188.90 करोड़ रुपये के निवेश की योजना भी बनाई है।
