टाटा ग्रुप में बड़े बदलाव की आहट: 70 की उम्र में बोर्ड से हट सकते हैं नोएल टाटा, उत्तराधिकारी को लेकर मंथन तेज

रतन टाटा के बाद ट्रस्ट्स की कमान संभालने वाले नोएल टाटा नवंबर में होंगे 70 साल के, ग्रुप की कई बड़ी कंपनियों में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप में जल्द बड़ा नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा नवंबर 2026 में 70 वर्ष के हो जाएंगे और इसी के साथ समूह की विभिन्न कंपनियों के बोर्ड से उनके रिटायरमेंट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। टाटा समूह में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि 65 वर्ष की उम्र के बाद एग्जीक्यूटिव जिम्मेदारियां छोड़ दी जाती हैं, जबकि 70 वर्ष की आयु पूरी होने पर नॉन-एग्जीक्यूटिव बोर्ड पदों से भी विदाई दी जाती है।

फिलहाल नोएल टाटा टाटा इनवेस्टमेंट कॉर्प, टाटा इंटरनेशनल, ट्रेंट और वोल्टास में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं चेयरपर्सन की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा वह टाइटन और टाटा स्टील में वाइस चेयरमैन और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी हैं। ऐसे में उनके संभावित उत्तराधिकारियों को लेकर टाटा समूह के भीतर मंथन जारी है।

सूत्रों के मुताबिक, रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स की कमान सौंपी गई थी। इससे पहले वह समूह की कई कंपनियों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं और 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्होंने एग्जीक्यूटिव जिम्मेदारियों से दूरी बना ली थी। हालांकि टाटा ट्रस्ट्स में चेयरमैन या ट्रस्टी पद के लिए कोई तय रिटायरमेंट आयु सीमा नहीं है।

टाटा संस के बोर्ड में वर्तमान में नोएल टाटा और उद्योगपति वेणु श्रीनिवासन, टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी डायरेक्टर के रूप में मौजूद हैं। गौरतलब है कि रतन टाटा आखिरी ऐसे शख्स थे जो एक साथ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के चेयरमैन एमेरिटस की भूमिका में रहे। वर्ष 2022 में टाटा संस ने अपने संविधान में संशोधन कर यह व्यवस्था खत्म कर दी थी कि कोई एक व्यक्ति दोनों पदों पर एक साथ बना रहे।

नोएल टाटा के नेतृत्व में समूह की कई कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। अप्रैल 2014 में ट्रेंट के चेयरमैन बनने के बाद कंपनी का कारोबार कई गुना बढ़ा। 2014 में घाटे में चल रही कंपनी ने वित्त वर्ष 2025 में 1,477 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। इसी अवधि में कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को करीब 3,500 प्रतिशत तक का रिटर्न दिया।

वहीं, अगस्त 2017 में वोल्टास की कमान संभालने के बाद कंपनी का राजस्व 6,404 करोड़ रुपये से बढ़कर 15,737 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनी का मुनाफा भी लगातार मजबूत हुआ और शेयरों में 150 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली। टाटा इनवेस्टमेंट कॉर्प ने भी पिछले पांच वर्षों में लगातार मजबूत ग्रोथ दर्ज की है।

टाटा समूह में यह संभावित बदलाव ऐसे समय सामने आ रहा है, जब समूह की कई कंपनियां बड़े पूंजीगत निवेश और विस्तार योजनाओं पर काम कर रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में टाटा ग्रुप की कंज्यूमर और इंडस्ट्रियल कंपनियों में नए नेतृत्व की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

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