जमशेदपुर/चाकुलिया: झारखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए बनाई गई सरकारी योजनाएं जमीन पर असरहीन साबित हो रही हैं। हालात यह हैं कि कोल्हान क्षेत्र में लगभग हर सप्ताह किसी न किसी की जान जा रही है, जबकि हाथियों की मौत के मामले भी सामने आ रहे हैं। सोमवार को चांडिल और चाकुलिया में हुई अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत ने स्थिति की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया है।
चाकुलिया प्रखंड के बड़ामारा पंचायत अंतर्गत चौठिया गांव के बांधडीह टोला में सोमवार सुबह एक दर्दनाक घटना घटी। 75 वर्षीय दुलारी मुर्मू कच्ची सड़क से होकर कहीं जा रही थीं, तभी अचानक एक जंगली हाथी उनके सामने आ गया। हाथी ने उन पर हमला कर उन्हें पटक दिया और दांत से पेट फाड़ दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।
सूचना मिलते ही प्रखंड प्रमुख भुवनेश्वर करुणामय और झामुमो प्रखंड अध्यक्ष शिवचरण हांसदा घटनास्थल पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। वन विभाग ने मृतका के पुत्र कुशल मुर्मू को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी है। साथ ही विभाग ने आश्वासन दिया है कि नियमानुसार शेष 3.5 लाख रुपये का मुआवजा तीन माह के भीतर दे दिया जाएगा। घटना के बाद गांव में हाथियों के बढ़ते आतंक को लेकर लोगों में डर और आक्रोश दोनों है।
सरकार की योजना पर सवाल
मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए झारखंड सरकार ने पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया और सरायकेला-खरसावां के चांडिल वनक्षेत्र में राज्य का पहला ‘एलीफेंट जोन’ विकसित करने की घोषणा की थी। इसके तहत करीब 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में सुरक्षित गलियारा बनाने की योजना थी, जिसमें चाकुलिया और चांडिल में 1000-1000 हेक्टेयर का विशेष जोन विकसित किया जाना था।
चिह्नित क्षेत्रों में चाकुलिया के काशिया, दक्षिणाशोल, रूपुशकुंडी और सपधारा तथा चांडिल के बुरूडीह और छतरमा शामिल थे। इसके साथ ही हाथियों और इंसानों की सुरक्षा के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा कवच तैयार करने की भी योजना बनाई गई थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर इस योजना का असर अब तक दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
