8वां वेतन आयोग: न्यूनतम वेतन ₹69,000 और 6% इंक्रीमेंट का प्रस्ताव, कर्मचारियों को मिल सकता बड़ा फायदा

एनसी-जेसीएम की सिफारिशों में सैलरी स्ट्रक्चर, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव का सुझाव, अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ, आखिरी फैसला सरकार ही लेगी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल काउंसिल (ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) यानी एनसी-जेसीएम की ड्राफ्ट कमेटी ने अपना फाइनल मेमोरेंडम पेश कर दिया है, जिसमें सैलरी, पेंशन और भत्तों में व्यापक बदलाव की सिफारिश की गई है।

इस मेमोरेंडम में बढ़ती महंगाई और बदलती जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम बेसिक वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही 3.83 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया गया है, जिससे कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बड़ा उछाल आ सकता है।

कमेटी ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि सभी बदलाव 1 जनवरी 2026 से लागू किए जाएं। इसके अलावा, सालाना वेतन वृद्धि दर को बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने की मांग की गई है, ताकि महंगाई के साथ वेतन का संतुलन बना रहे।

सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव
ड्राफ्ट में मौजूदा सैलरी मैट्रिक्स को सरल बनाने की भी सिफारिश की गई है। इसके तहत 7वें वेतन आयोग के 18 लेवल को घटाकर 7 बड़े वेतन ग्रेड में समाहित करने का प्रस्ताव है। इससे प्रमोशन प्रक्रिया आसान होने और कर्मचारियों को करियर में तेजी से आगे बढ़ने का अवसर मिलने की उम्मीद है।

उदाहरण के तौर पर, सबसे निचले वेतन स्तर पर बेसिक पे 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है, जबकि अगले स्तरों पर यह 83,200 रुपये और 1.12 लाख रुपये तक हो सकती है। मिड-लेवल कर्मचारियों के लिए बेसिक वेतन 1.35 लाख से लेकर 2.15 लाख रुपये या उससे अधिक तक जाने का अनुमान है।

पेंशन और प्रमोशन पर जोर
मेमोरेंडम में 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी की गई है। इसके तहत पेंशन को अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत और पारिवारिक पेंशन को 50 प्रतिशत तय करने का सुझाव है।

इसके अलावा, कर्मचारियों को 30 साल की सेवा अवधि में कम से कम पांच प्रमोशन या वित्तीय उन्नयन देने की सिफारिश की गई है। साथ ही हर पांच साल में पेंशन रिवीजन की मांग भी उठाई गई है।

भत्तों और सामाजिक सुरक्षा
ड्राफ्ट में हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है, जिसमें न्यूनतम 30 प्रतिशत तक की दर सुझाई गई है। मेट्रो शहरों के लिए इससे अधिक दर लागू करने की बात कही गई है।

इसके अलावा, बेहतर बीमा कवर, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर अधिक मुआवजा, लीव एनकैशमेंट की सीमा हटाने और मातृत्व अवकाश को 240 दिन करने का सुझाव दिया गया है। पितृत्व अवकाश और माता-पिता की देखभाल के लिए अतिरिक्त छुट्टियों का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

क्या होगा आगे
एनसी-जेसीएम विभिन्न कर्मचारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए यह मेमोरेंडम 8वें वेतन आयोग के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। हालांकि, ये सभी सिफारिशें अभी प्रस्ताव के रूप में हैं और अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा ही लिया जाएगा।

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