गुवा में रांजाबुरु खदान के खिलाफ उग्र हुआ आंदोलन, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को लेकर 72 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे ग्रामीण
गुवा: गुवा क्षेत्र में सेल की रांजाबुरु खदान परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर सैकड़ों लोग भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। गुवा क्षेत्र में सेल की रांजाबुरु खदान परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है। रोजगार और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर सैकड़ों लोग भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा क्षेत्र में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की रांजाबुरु खदान परियोजना के विरोध में 12 गांवों के मुंडा-मानकी और ग्रामीणों ने जनरल ऑफिस के समक्ष 72 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इस आंदोलन में करीब 500 ग्रामीण शामिल हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं, लेकिन सेल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, खनन गतिविधियों के कारण उनकी खेती बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खदान से निकलने वाली धूल, मिट्टी और लाल पानी खेतों में पहुंचकर उपजाऊ जमीन को बंजर बना रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कारो नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है, जिससे पीने और दैनिक उपयोग के लिए संकट पैदा हो गया है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
इससे पहले 13 फरवरी को रोजगार को लेकर धरना और 27 फरवरी को थाली-कटोरा बजाकर विरोध प्रदर्शन किया गया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। 7 अप्रैल को काशियापेचा गांव में आयोजित ग्राम सभा में सर्वसम्मति से 15 अप्रैल से भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया गया था।
आंदोलन का नेतृत्व सारंडा पीढ़ के मानकी सुरेश चाम्पिया कर रहे हैं। उनके साथ बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं शामिल हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 72 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सेल का चक्का जाम कर उत्पादन पूरी तरह ठप कर देंगे।
