चाकुलिया एरोड्रम का AAI ने किया सर्वे, एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावना तलाशी
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना द्वितीय विश्व युद्धकालीन 515 एकड़ एरोड्रम का निरीक्षण, जमीन व इंफ्रास्ट्रक्चर का किया आकलन
515 एकड़ में फैला है बंद पड़ा एरोड्रम।
-स्टेशन से दूरी महज 3 किमी, NH-18 से 13 किमी।
-वर्षों से बंद पड़ा है यह सामरिक एरोड्रम।
– हवाई अड्डा से स्टेशन की दूरी लगभग तीन किलोमीटर।
– हवाई अड्डा से एनएच 18 की दूरी 13 किलोमीटर।
– टीम ने धालभूमगढ़ में भी पुराने एयरपोर्ट का निरीक्षण किया।
चाकुलिया: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की पांच सदस्यीय टीम ने शनिवार को द्वितीय विश्व युद्धकालीन बंद पड़े चाकुलिया सामरिक एरोड्रम का सर्वे किया। टीम ने एरोड्रम को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन किया।
डीजीएम (एटीएम) अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने स्थानीय अधिकारियों के साथ रनवे, भूमि की स्थिति, नक्शा मिलान और स्वामित्व संबंधी पहलुओं की जांच की। साथ ही संचालन में आने वाली संभावित चुनौतियों पर भी विचार किया गया।
टीम के सदस्य चाकुलिया के अंचल अधिकारी नवीन पुरती, अंचल निरीक्षक परमानंद सिंह, अंचल अमीन धर्मेंद्र महतो के साथ चाकुलिया एरोड्रम स्थित मुख्य रनवे पर पहुंचे। मौके पर सुरक्षा के कारणों एरोड्रम का बारीकी से अवलोकन किया। नक्शा के साथ एरोड्रम की भूमि एवं नक्शे का मिलान किया। टीम ने यह देखा कि एरोड्रम की कितनी जमीन है और किस स्थिति में है। जमीन का स्वरूप क्या है और इसमें कौन-कौन अंश दार हैं। एरोड्रम का संचालन शुरू करने में क्या- क्या आधारभूत कठिनाइयां हैं। तमाम बिंदुओं पर गौर करने के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम चाकुलिया के अंचल कार्यालय पहुंची तथा सीओ नवीन पुरती एवं अंचल कर्मियों के साथ बैठकर विस्तार से सभी बिंदुओं पर चर्चा की।
टीम ने अंचल कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा की। केंद्र सरकार की 2036 तक 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना के तहत पुराने एरोड्रम का सर्वे किया जा रहा है।
गौरतलब है कि धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना अब भी वन भूमि, एलिफेंट कॉरिडोर और अन्य कारणों से लंबित है। वन भूमि, एलिफेंट कॉरिडोर, आदिवासियों के उपासना स्थल समेत कई प्रकार की बाधाओं के कारण धालभूमगढ़ में एयरपोर्ट निर्माण में विलंब हो रहा है।
