’प्रत्याशा’ कथक वर्कशॉप का आगाज : संदीप मलिक ने सिखाए नृत्य के मूल तत्व
कथक एक शाश्वत संस्कार है: संदीप मलिक | झारखंड में सुविधाओं की कमी बड़ी चुनौती: मोनिका डे
रांची: ‘नृत्यशाला’ संस्था के तत्वावधान में ‘प्रत्याशा’ नामक नेशनल कथक नृत्य कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार को मैकॉन इस्पात क्लब में हुआ। देश के प्रख्यात कथक नर्तक और कोरियोग्राफर संदीप मलिक ने कार्यशाला में प्रतिभागियों को पारंपरिक कथक, बेसिक मूवमेंट, ताल, स्तुति और ठुमरी की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। इस अवसर पर सैकड़ों प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।
कार्यशाला का उद्घाटन संदीप मलिक, मोनिका डे और दीपक नंदी ने संयुक्त रूप से किया। यह आयोजन 12 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें विभिन्न स्तर के विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र रखे गए हैं।
संदीप मलिक ने कहा कि कथक केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि एक संस्कार है, जो अतीत से वर्तमान तक और भविष्य में भी कायम रहेगा। उन्होंने कहा कि आज के समय में कम बच्चे शास्त्रीय नृत्य की ओर आ रहे हैं, लेकिन जो सीख रहे हैं, वे उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने इसे समुद्र से मोती पाने की प्रक्रिया से जोड़ते हुए कहा कि गहराई में उतरने वालों को ही असली कला मिलती है।
मोनिका डे ने झारखंड में कथक सीखने के इच्छुक बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन संसाधनों और सुविधाओं का अभाव एक बड़ी समस्या है। उन्होंने बताया कि शुरुआती विद्यार्थियों के लिए ‘परिचय’ और अनुभवी कलाकारों के लिए ‘गहराई’ नाम से अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए हैं।
कार्यशाला के समापन पर 12 अप्रैल को सभी प्रतिभागियों को भागीदारी प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
