छठ महापर्व पर जमशेदपुर में दिखा आस्था सागर, भगवान सूर्य की उपासना में डूबा पूरा शहर

  • खरकई व स्वर्णरेखा नदी के घाटों पर गूंजे छठ गीत
  • कृत्रिम तालाबों में भी उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
  • भक्ति के साथ श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को दिए अर्घ्य

जमशेदपुर। सूर्य उपासना के महापर्व छठ ने एक बार फिर पूरे जमशेदपुर शहर को आस्था के रंग में रंग दिया है। सोमवार की शाम जैसे ही अस्ताचलगामी सूर्य का समय हुआ, श्रद्धालु महिलाओं ने साड़ी के पल्लू से टोकरी उठाई, माथे पर सिंदूर की लंबी रेखा और आंखों में अटूट विश्वास के साथ अर्घ्य देने का अनुष्ठान पूरा किया।

स्वर्णरेखा और खरकाई नदियों के घाटों पर छठ व्रतियों और उनके परिवारजनों की भीड़ उमड़ पड़ी।

साथ ही, शहर के विभिन्न तालाबों, जलाशयों और कृत्रिम घाटों पर भी श्रद्धालुओं ने जल में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया।

पूरा माहौल “केलवा जे पात पे उगेल सन सुरज देव” जैसे पारंपरिक छठ गीतों से गूंज उठा।

विश्वास की रोशनी व सुरक्षा का पहरा
इस अवसर पर प्रशासन ने भी कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। घाटों पर गोताखोरों की तैनाती, पुलिस बलों की निगरानी, और स्वयंसेवी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी से पर्व शांति और श्रद्धा के साथ संपन्न हो रहा है।
नगर निगम द्वारा घाटों की सफाई, रोशनी और व्यवस्था में कोई कमी नहीं छोड़ी गई।

राजनीतिक दलों के स्थानीय नेताओं ने भी घाटों का भ्रमण कर व्रतियों का अभिवादन किया और “छठ मइया” से क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।

आस्था, परंपरा और आधुनिकता का संगम
जहां एक ओर परंपरा की छटा बिखरी हुई है, वहीं आधुनिक जमशेदपुर ने भी छठ के उत्सव को नए रूप में अपनाया है। कृत्रिम तालाबों और सोसाइटी परिसरों में बनाए गए छोटे-छोटे घाटों ने उन लोगों को भी आस्था से जोड़ा है जो नदी किनारे नहीं जा सके।

महिलाओं ने घरों की छतों और बगीचों में भी ‘छोटे घाट’ सजाए, दीपों से वातावरण को आलोकित किया और पूरे शहर को एक आध्यात्मिक उत्सव स्थल में बदल दिया।

उगते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य, पर्व का होगा समापन
कल मंगलवार सुबह व्रतधारी महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने 36 घंटे के निर्जला व्रत का समापन करेंगी।
“छठ मइया” से घर-परिवार की समृद्धि और सुख-शांति की कामना के साथ, जमशेदपुर का हर कोना आस्था से आलोकित है।

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