- 110वीं वर्षगांठ पर हो रहा भव्य आयोजन
- नव-निर्मित गौशाला भवन का लोकार्पण 29 को
- परंपरा व आधुनिकता का संगम बनेगा आयोजन
जमशेदपुर : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया स्थित कलकत्ता पिंजरापोल सोसाइटी (शाखा चाकुलिया) द्वारा संचालित गौशाला, जो अपनी सेवा, परंपरा और राष्ट्रवादी भावना के लिए राष्ट्रीय पहचान रखती है, एक बार फिर सुर्खियों में है।
झुनझुनवाला युग की विरासत से लेकर गोयनका नेतृत्व तक
चाकुलिया गौशाला की नींव भले ही एक सदी से अधिक पहले रखी गई थी, परंतु इसकी राष्ट्रीय पहचान तब बनी जब पुरुषोत्तम दास झुनझुनवाला ने इसका नेतृत्व संभाला।
इस बार चर्चा का कारण है — इसकी 110वीं वर्षगांठ और नव-निर्मित गौशाला भवन का लोकार्पण समारोह, जो 29 अक्टूबर 2025 (बुधवार) को धूमधाम से आयोजित किया जाएगा।
यह अवसर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उस विरासत के पुनरुत्थान का प्रतीक है, जिसे दशकों तक प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता, गौसेवक और विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे पुरुषोत्तम दास झुनझुनवाला ने अपने जीवन का ध्येय बनाया था।
उनके नेतृत्व में यह संस्था केवल गायों की सेवा का केंद्र नहीं रही, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का प्रतीक बन गई।
पुरुषोत्तम बाबू के परलोक गमन के बाद इस विरासत की जिम्मेदारी संभाली है गिरधारी लाल गोयनका ने — जो चाकुलिया की मिट्टी के सपूत, कोलकाता के प्रसिद्ध उद्योगपति, चार्टर्ड अकाउंटेंट और समाजसेवी हैं।
गोयनका ने गौशाला को न केवल नया स्वरूप देने का बीड़ा उठाया है, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर पुनः पहचान दिलाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं।
उनके नेतृत्व में अब यह संस्था “सेवा से समर्पण तक” की भावना को नए आयाम पर ले जाने को तैयार है।
गोपाष्टमी पर नए गौशाला भवन का लोकार्पण
गौशाला की 110वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में तैयारियों का दौर चरम पर है। समिति द्वारा जारी कार्यक्रम पत्र के अनुसार,
29 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:30 बजे नव-निर्मित गौशाला भवन का लोकार्पण समारोह आयोजित किया जाएगा।
यह नया भवन गौसेवा, गौसंरक्षण और आधुनिक सुविधाओं का समन्वय प्रस्तुत करेगा।
भवन में स्वच्छ जल प्रबंधन, पोषणयुक्त चारे की व्यवस्था, स्वास्थ्य परीक्षण कक्ष, और पर्यावरण संरक्षण आधारित गोबर-गोमूत्र उत्पाद निर्माण इकाई भी स्थापित की जा रही है।
कार्यक्रम के अगले दिन, 30 अक्टूबर को दीपावली मिलन समारोह एवं गौ महोत्सव आयोजित किया जाएगा, जिसमें भक्ति संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, भजन संध्या और गोसेवा सम्मान समारोह जैसे कार्यक्रम होंगे।
‘दीपावली पर्व’ बना ‘गौसंरक्षण प्रेरणा दिवस’
इस बार का आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी लेकर आया। , गिरधारी लाल गोयनका के आह्वान पर— “दीपावली पर्व को गौ संरक्षण प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया ।
29 व 30 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम को लेकर चाकुलिया गौशाला की समिति ने अपने आमंत्रण पत्र में सभी सदस्यों, नागरिकों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर न केवल कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएं, बल्कि गायों की सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
गौशाला समिति के अध्यक्ष गिरधारी लाल गोयनका ने कहा कि चाकुलिया गौशाला हमारे पूर्वजों की आस्था और सेवा भावना का प्रतीक है।
अब समय है कि हम इसे आधुनिकता से जोड़ते हुए इसकी परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। यह केवल गौशाला नहीं, बल्कि संस्कृति और संस्कार का केंद्र है।
सदी पुरानी संस्था — आधुनिक भारत की सोच के साथ
चाकुलिया गौशाला की स्थापना वर्ष 1915 में हुई थी, जब समाज में पशुप्रेम और धर्म के प्रति निष्ठा को संस्थागत स्वरूप देने का प्रयास शुरू हुआ था।
तब से लेकर अब तक इस संस्था ने न केवल गायों की सेवा की, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, गौ-आधारित उत्पाद, और आयुर्वेदिक परंपराओं के संवर्धन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वर्तमान में यहां सैकड़ों गौवंशीय पशु हैं, जिनकी देखभाल आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पद्धतियों के समन्वय से की जाती है। गौशाला से उत्पादित गोमूत्र अर्क, पंचगव्य, दीपक निर्माण सामग्री, और जैविक खाद जैसी वस्तुएं स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय हैं।
समाजसेवियों व दानदाताओं का विशेष योगदान
गौशाला की प्रगति में स्थानीय समाजसेवियों, व्यापारियों और दानदाताओं का विशेष योगदान रहा है। समिति के सदस्यों ने बताया कि बीते वर्षों में कई लोगों ने भूमि विस्तार, भवन निर्माण, चारा भंडार और चिकित्सीय उपकरणों की व्यवस्था के लिए उदार दान दिया है।
गौशाला परिसर में अब एक “गौ आरोग्य केंद्र” भी शुरू किया जा रहा है, जिसमें पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी।
गिरधारी लाल गोयनका ने बताया कि भविष्य में गौशाला को “मॉडल गौशाला” के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, ताकि देशभर की अन्य संस्थाएं इससे प्रेरणा ले सकें।
संस्कृति व श्रद्धा का केंद्र बनेगा चाकुलिया
गौशाला के 110वें वर्ष में आयोजित होने वाला यह समारोह केवल एक ऐतिहासिक अवसर नहीं, बल्कि उस आध्यात्मिक परंपरा के पुनर्जागरण का प्रतीक है जो सदियों से भारत की आत्मा रही है।
आयोजन समिति के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान भजन संध्या, दीप प्रज्वलन, सामूहिक गोपूजन, और गौसेवकों का सम्मान जैसे आयोजन होंगे। देशभर से संत-महात्मा, धर्माचार्य, दानदाता और सामाजिक कार्यकर्ता इसमें भाग लेने आ रहे हैं।
शुभकामनाओं संग गोयनका का संदेश
आयोजन के अवसर पर समिति की ओर से जारी संदेश में अध्यक्ष गिरधारी लाल गोयनका ने कहा कि हम सबके लिए यह गर्व का विषय है कि चाकुलिया गौशाला ने 110 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पूरी की है।यह केवल ईंट और पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि सेवा, त्याग और श्रद्धा की जीवंत परंपरा है।
हम सभी से आग्रह है कि दीपावली जैसे शुभ अवसर पर गौसेवा को अपनी संस्कृति का हिस्सा बनाएं।
उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी नागरिकों से सहयोग की अपील की और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
गौशाला: परंपरा, सेवा व समाज का संगम
आज जब भारत “विकसित राष्ट्र” बनने की दिशा में अग्रसर है, तब चाकुलिया जैसी संस्थाएं हमें यह याद दिलाती हैं कि प्रगति केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक विकास से भी आती है।
गौशाला का यह आयोजन न केवल चाकुलिया बल्कि पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है — जहां स्थानीय भावना, राष्ट्रीय सोच और सनातन संस्कृति का सुंदर संगम देखने को मिलेगा।
